Diwali Mnana Chahta Hun | Mid Night Diary | Vinay Kumar

दिवाली मानना चाहता हूँ | विनय कुमार

क्यों तुम मुझे
मैं जैसा हूँ
वैसा नहीं अपनाते
क्यों तुम मुझे
दूसरे लोगोँ से
तोलते हो
क्यों तुम मुझे
वो बनाना चाहते हो

जो मैं हु ही नहीं
मैं सावन की घटा
नहीं तो क्या हुआ
मैं उस जंगल का
छोटा सा तालाब हूँ

जो खुद प्यासा
रहता है पर
दुसरो की प्यास
बुझाता है

मुझे नही छूना
उस आसमान को
मैं तो मिट्टी में
रेंगते उस कीड़े से
बातें करना चाहता हूँ


मुझे नही बनाना
वो ख़ामोशी का पुतला
मैं तो बच्चों में बच्चा बन
खुली हँसी बिखरना चाहता हूँ

मुझे नही भागना
चाँद तारो के पीछे
मैं तो जुग्नूओ संग
दिवाली मानना चाहता हूँ

मुझे नही भागना
चाँद तारो के पीछे
मैं तो जुग्नूओ संग
दिवाली मानना चाहता हूँ

-विनय कुमार

Vinay Kumar
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