दिल टूटा नहीं था मेरा | प्रिया मेहरा

दिल टूटा नहीं था मेरा,
क्योंकि नेक था वो
जिससे मुझे मोहब्बत हुई,
मन भरने के बाद बड़ी ही
हिफाज़त से लौटा गया दिल
ये कह कर की नहीं कर सकता वो बेवफ़ाई अब मुझसे ,

बेवफ़ाई उससे हुई नहीं
और वफा मुझसे वो करे
ऐसी किस्मत मेरी हुई नही,
दिल टूटा नहीं था मेरा,
बस सारे ख़्वाब टुट से गए ,
जिसे पाकर आज खुश थी
आज वही उदास कर गए ।

कुछ हसीन पल ही तो साथ उनके बिताय थे
उनकी मंजूरी के बिना ही ख़्वाब सारे सजाय थे ,
ख्वाब अगर वो दिखाता तो शिकायत करती यहॉ तो ख़्वाब भी मेरे थे और मंजूरी भी मेरी.
दिल टूटा नहीं था मेरा,
क्योंकि भले ही मोहब्बत उनको न थी
लेकिन नफरत भी वो कर न सके,

दिल टूटा नहीं था मेरा
बस टुट गई थी मै उसके चले जाने से,
हार गयी थी मै इस जमाने से ,
न थी मेरी जीने की वजह
पर जी गयी उसके इंतजार में
दिल टूटा नही था मेरा,

क्योंकि वो कह कर गया था
कि मुस्कराते रहना
ये हसी है उसे पसन्द
जरा ख्याल रखना अपना क्योंकि मै हूँ उसकी पसन्द
दिल टूटा नही था मेरा
क्योंकि तलाश भले ही उन्हें

अपनी हमसफ़र की थी
पर वो चल रहे थे साथ मेरे,
शायद उन्हें मालूम था की टुट जाती मैं उनके चले जाने से रुठ जाती मैं इस जमाने से,
साथ रहा वो शायद इसी बहाने से,
तोड़ देते दिल तो शायद जीना आसान होता, कुछ ना सही बेवफा तो उनका नाम होता.
दिल भी नहीं तोड़ा और वफा भी न की
उलझनो मे रह गयी हु गुमनाम सी,

उसने ना गैरो मे मुझे शामिल किया
ना ही अपना अपना बनाया
फिर भी मोहब्बत है उनसे
क्योंकि दिल टूटा नहीं था मेरा
टूटी थी तो बस मै और मेरी ख़्वाहिशे……

 

 

-प्रिया मेहरा 

 

Priya Mehra
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