Dharti Aakash Ka Aalingan

इतनी मोहाब्बत न करो मुझसे
कहीं मैं डूब न जाऊँ
समुद्र में उफनती लहरों की तरह
कहीं खुद में से उफन
तुझमें न गिर जाऊँ !

मोहाब्बत में तेरे आस्था की खुशबू थी
तेरे कंधे के एक तरफ होकर
न जाने, कितनी सिसकियां
तूझे सुनाती थी,

मैं न रखती थी इनका हिसाब
पर, तूझे देखा, ये क्या
तू तो, मेरे दर्द की माला में है !

अब जन्म-जन्म का रिश्ता हमारा
मैं आधी, तू आधा
एक नाम का व्यक्तित्व हमारा
मैं खुद से ही खुद को पूछूं
कि, मैं रहुँगी न तुझमें
हाँ…

पर, तू भी न कहना कभी अलविदा
तूझे दुआओं-सा, पढ़ना है मुझको
जब भी मानव जन्म पहनुँगी
ईश्वर की रहम-से !!

 

-सुरभी आनंद

 

Surbhi Anand
Surbhi Anand

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