डिअर लव | प्रतिभा सिंह

जब ज़िन्दगी दर्द देगी..
तो तुम्हें मेरी याद तो आयेगी ना…

खुशिया कितनी भी हो तब…

तुम्हें खुद को सम्भालने के लिए..
मेरी जरूरत तो महसूस होगी ना…

वक़्त बीत जायेगा कितना भी..
फिर भी तुम्हारी यादो में मेरी बातें तो होंगी ना…

तुम चाहे सबसे छुपा लो हाल अपने दिल का…

पर मेरे सामने आते ही दर्द सारे तुम्हारे..
मन के भीतर ही तो रूक ना पायेगे ना…

खुशिया कितनी भी हो तुम्हारी ज़िन्दगी में..
पर जब उदासी होगी दिल में तुम्हारे तो..
मैं तुम्हें याद तो आऊगी ना…

माना ख्वाब देखे थे मैंने भी तुम्हारे साथ में…

पर जब भी देखोगे तुम अपनी नन्ही बिटिया की नादानिया..
तब-तब तो मैं तुम्हारी नजरों से होकर गुजर जाऊगी ना…

जब ज़िन्दगी दर्द देगी..
तो तुम्हें मेरी याद तो आयेगी ना…

भुल जाना मुझे ऐसा मुझे तुमने ही कहा था ना..
पर जब खो जाओगे कभी पुरानी यादो में तुम..
तो मेरी अट्खेलिया याद करके तो मुस्कुराओगे ना…

पागल थी वो, बस एक यही बात कह कर..
थोड़ा सा तो तुम्हें छेड़ जाऊगी ना…

होंठों पर मुस्कान और आँखो में थोड़ी सी नमी..
उस वक़्त भी मैं तुम्हें दे जाऊगी ना…

तब खुशिया कितनी भी होंगी तुम्हारी ज़िन्दगी में…

पर जब पल्टोगे तुम किताब के वो पुराने से पन्ने, हमारी ज़िन्दगी के..
तो तुम्हें मेरी थोड़ी सी कमी भी तो सतायेगी ना…

जब ज़िन्दगी दर्द देगी..
तो तुम्हें मेरी याद तो आयेगी ना…

देखोगे जब कभी पीछे मुड़कर..
तो मेरा एक टूटा सा, आशियाना भी तो नजर आएगा ना…

थामोगे जब किसी का हाथ तो, मेरे हाथों की छुअन..
का अहसास तो तुम्हें छू जाएगा ना…

होगे जब तुम अपनी आबाद सी किसी दुनिया में..
तो मेरी बर्बाद सी ज़िन्दगी का मंजर भी तो..
कभी तुम्हें नजर आएगा ना…

उस वक़्त तुम किसी से कुछ कह ना सकोगे..
तब तो मेरी आदत थी, का अहसास तुम्हें हो जायेगा ना…

जब ज़िन्दगी दर्द देगी..
तो तुम्हें मेरी याद तो आयेगी ना…

 

-प्रतिभा सिंह 

 

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