Dasak Aazadi ko - Independence Day Special | Mid Night Diary | Ujjwal Kaushik

दशक आज़ादी को | उज्जवल कौशिक | इंडिपेंडेंट डे स्पेशल

उस रोज वह जल्दी उठ गया। उठते ही ना आव देखा ना ताव गिरता पड़ता घर के मुख्य दरवाजे की ओर भागा । काले रंग का बड़ा लोहे का दरवाजा जिसके भीतर से वह बाहर झांकने लगा। उम्र छोटी थी । कद भी छोटा था इसलिए दरवाजे की कुंडी तक हाथ ना पहुँच सका।

ना जाने दरवाजे के उस पर इधर उधर से झांक कर किसे ढूंढ रहा था। किसका इंतेजार कर रहा था । बहुत देर तक ऐसे ही देखता रहा पर जब काफी समय तक कोई आता जाता ना दिखा तो फिर थक कर फर्श पर बैठ गया।

दरवाजे के भीतर एक गाड़ी खड़ी थी। धूल चढ़ी हुई एक गाड़ी । मानो कि जिसकी कोई देखभाल करना भूल गया हो । ना जाने अचानक उस बच्चे के दिमाग में क्या आया और वो झुक कर उस गाड़ी के नीचे देखने लगा । फर्श पर धूल के सिवा वहाँ कुछ भी नही था।

फिर एकदम से उठ कर वह गाड़ी के बगल में गर्दन तिरछी करके झांकने लगा । वहाँ ना जाने क्या पड़ा दिख गया उसको जिसे वो उठाना चाहता था । उसने उठाने के लिए हाथ बढ़ाया पर जगह कम होने के कारण उसका हाथ ना पहुँच सका ।

हाथों से काम ना बनता देख वो भाग कर अंदर से झाड़ू उठा लाया और नीचे जमीन पर लेट कर हाथ बढ़ा निकालने लगा कि तभी अचानक ही दरवाजे के उस तरफ से आवाज़ आई, “राम राम छोटे ठाकुर, आज इतनी जल्दी उठ गए आप !”

वो बच्चा आवाज़ सुन झाड़ू छोड़ एकदम ऐसे खड़ा हुआ कि मानो उसी शक़्स का इंतेजार कर रहा हो ! “कहाँ रह गए थे? मैं कब से आपका इंतेजार कर रहा हूँ” बच्चे ने कहा।

यह सुन उस शक़्स ने साईकल के पिछली तरफ से अखबार निकाल कर बच्चे की ओर अख़बार बढ़ाते हुए बोला, “माफ करना छोटे ठाकुर पर मैं तो रोज़ की तरह समय पर ही हूँ, पर आपको आज जल्दी उठा देख हैरत में हूँ।”

उस बच्चे ने झपट कर दरवाजे की किनारी से अख़बार पकड़ा और भीतर भाग गया। अपने कमरे में जा ज़मीन पर बैठ उसने अख़बार जमीन पर रखा और एक एक ख़बर को ध्यान से देखने लगा या यूं कहिए चित्र देखने लगा क्योंकि अभी पढ़ नहीं पाता था। अचानक एक तस्वीर पर रुक गया और मुस्काने लगा और भाग कर केंची लाकर उस तस्वीर को ध्यान से काटा और अपने पिता की दी इक डायरी में चिपकायी और पेंसिल से उसके नीचे बड़ा सजाकर 10 अंक डाला।

फिर बड़ी उत्सुकता में उस क़िताब को अपनी माँ के पास ले जाकर दिखाया और बोला, “माँ पिताजी ने एक बार फ़िर दुश्मनों को मार गिराया।”

तस्वीर देख माँ सुन्न रह गई और अपनी आँखों में आए आँसुओ को छुपा कर चेहरे पर झूठी मुस्कान के साथ उस बच्चे को गले से लगा लिया।

 

-उज्जवल कौशिक

 

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