Love Dard

दर्द | अमन सिंह | #बेनामख़त

मेरे होठों से बिखरे हुए लफ्ज़ जब कभी तुम्हारी यादों को समेटने की कोशिश करते हैं तो बस मेरी पलकों से भावनायों के बाँध टूट जाते हैं। दिल बेशक़ ही ज़ोरों से धड़कता है लेकिन ऐसा महसूस होता है जैसे साँसें उलझ सी गयी हैं। आँखों से अश्कों का रिश्ता कहो या दिल्लगी, यह अश्क रोज पलकों से यूँ मिलते हैं जैसे चांदनी रात में उसकी नज़रों से ख्वाब…

तेरा दिया दर्द इस शिद्दत से अपना बैठें हैं कि बस अब तो दर्द न मिले तो दिल बेचैन सा हो जाता है। तेरा इन्तजार करना तो नहीं चाहता हूँ पर कोई और काम भी नहीं, मेरे पास.. हाँ गलतियाँ सभी से होती है, मुझसे हुई.. गलती यह नहीं कि मैंने प्यार किया बल्कि गलती यह है कि तुमसे किया..बस एक और बेनाम सा ख़त तुम्हारे नाम उन अधूरी बातों के साथ जिन्हें मैं किसी से कह नहीं पाता।

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16 thoughts on “दर्द | अमन सिंह | #बेनामख़त

  1. आपके बेनाम खत को पढ़ने मात्र से ही मावनाएँ उजागर हो जाती हैं, पर मैंने इसे दोबारा बोल बोलकर पढ़ा तो लगा मानो माने किसी से कुछ अनकहा कह डाला हो,मन की बात जो होंटो पे अटकी हुई थी मानो बाहर आ गई हो।बेहद खूबसूरत बेनाम खत

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