भावन त्रिपाठी

दर्द भरी ख़ामोशी | भावना त्रिपाठी

वह गूंगा नहीं था, मगर इन बारह सालों में एक लफ्ज़ भी नहीं बोला था। वक़्त की मार ने उसके मुंह में ताले जड़ दिए थे।

छः साल का असद ,जब भी अपनी बीमार अम्मी से अब्बू की बेरुखी का कारण पूछता तो अम्मी खटिए पर करवट बदलती, अपनी भीगी आंखें चुपचाप पोंछतीं और अब्बू के घिनौने रिश्ते का सच छुपाकर  कहती,”उन पर बहुत जिम्मेदारी है ना असद! वह हम सब को खुश रखना चाहते हैं।”

यह कैसी जिम्मेदारी उठाई थी अब्बू ने! बीमार अम्मी को तीन बार तलाक का फरमान सुना कर चले गए थे ।बीमार अम्मी सदमा बर्दाश्त करने में नाकाम रही और असद को छोड़कर हमेशा के लिए खुदा के पास चली गई ।

खिलौने से खेलने की उम्र में जब असद के साथ किस्मत ने ऐसा खेल खेला तो उसने तनहाई को ही अपना साथी बना लिया ।

अट्ठारह साल के असद के मुंह से किसी ने आज तक एक लफ्ज़ नहीं सुना पर लोग कहते हैं उसकी आंखें बोलती हैं, अपनी अम्मी की साथ हुई नाइंसाफी की कहानी। तन्हा बैठा असद मानो कहता हो कि वह कभी तीन तलाक को नहीं मानेगा।

 

-भावना त्रिपाठी

 

Bhavna Tripathi
Bhavna Tripathi

777total visits,1visits today

14 thoughts on “दर्द भरी ख़ामोशी | भावना त्रिपाठी

  1. बेहद ही कम शब्दों मे पूरी बात कह दी मित्र आपने..
    Awssmmm..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!
%d bloggers like this: