डांसिंग ड्रॉप्स | अमन सिंह | #एंडलेसजर्नीऑफ़ मेमोरीज

“क्या नाम है आपका?” जज ने पूंछा।
“रिचा तोमर…”
“कहाँ से आयीं हैं, आप?” दूसरे जज ने पूँछा।
“सर मैं इंदौर से ही हूँ।” रिचा में अपने बालों को कान के पीछे ले जाते हुए कहा।
“पता है रिचा, आप बहुत अच्छे डांसर हो….” जज ने कहा।
“थैंक यू सर… ” रिचा ने बोलना चाहा, लेकिन तभी जज ने उसे टोक दिया, “लेकिन… आज कुछ कमी रह गयी। आज आपकी परफॉरमेंस में वह बात नहीं थी। ” रिचा बड़े ही ध्यान से जज की बातें सुन रहीं थी। उसके दिल की धडकनें लगातार बढती जा रही थी।
“बट वी आर वेरी सॉरी रिचा, आप आगे नहीं जा सकती, यू आर डिसक्वालीफाईड…” जज ने अपनी बात खत्म की।

जज की बात सुनते ही मानों पूरा माहौल खामोश सा हो गया। सारे ख्वाब, सारी उम्मीदें एक एक करके आँखों के रास्ते होकर रिचा का साथ छोड़ रहे थे। कुछ ख्वाब ही तो थे, जिनका दामन थाम वह जमाने की बंदिशों से लड़ने चली थी लेकिन आज वही ख्वाब उसे अकेला छोड़ बिखर गए थे। बीते कई सालों की कड़ी मेहनत जैसे एक पल में ही रेत के मकान की तरह ढह गयी। उसके थिरकते हुए कदम जैसे अब लडखडा रहे थे। वह कुछ नहीं बोली और वहाँ से चुपचाप निकल आई।

घर वालों से क्या कहेगी? मोहल्ले वाले क्या कहेंगे और तो और डांस के अलावा आता ही की है उसे… न जाने कितने ही सवाल जहन में लिए वहाँ से बाहर निकल सड़क पर आ गयी। अपनी ही सोंच में डूबी न जाने कब तक वह, सड़क किनारे यूँ ही पैदल चलते हुए काफी दूर निकल आई। अपने आप में गुम रिचा चलते चलते सड़क के बीच में आ गयी। सूनसान रात, आती जाती तेज रफ़्तार में गाड़ियाँ और इनके बीच में गुमशुदा सी रिचा। बेशुध सी रिचा आगे बढती ही जा रही थी कि तभी तभी पीछे से एक तेज हॉर्न की आवाज आई लेकिन उसने ध्यान नहीं दिया।

गाड़ी की रफ़्तार तेज थी। बार-बार हॉर्न बजाने पर भी रिचा को उसकी आवाज सुनाई नहीं थी। वह अभी गाड़ी से टकराने वाली ही थी कि अचानक उसे किसी ने अपनी तरफ खीच लिया।

“अरे जरा देखकर, अभी एक्सीडेंट हो जाता आपका…” किसी ने रिचा को पीछे से खीचते हुए कहा। रिचा ने मुरझाये चेहरे से उस शख्स की ओर देखा और किसी बेजान लाश की तरह आगे बढ़ गयी। उस शख्स को रिचा का बर्ताव थोड़ा अजीब लगा। उसने रिचा को पीछे से आवाज देते हुए कहा, “अरे जरा सुनिए तो, लगता है आप किसी बात से परेशान हैं?” रिचा उसे अनसुना करके आगे चली जा रही थी। उस शख्स ने रिचा को कई बार टोकने की कोशिश की लेकिन रिचा ने ध्यान नहीं दिया।

उस शख्स ने एक बार फिर कोशिश की, तो रिचा ने झल्ला के कहा, “आपकी प्रॉब्लम क्या है? क्यूँ आप मेरे पीछे पड़े हैं?”
“प्रॉब्लम मेरी है या आपकी? जो इतनी रात गए अकेले सूनसान सड़क पर आप चले जा रही हैं।” उस शख्स ने लगभग डांटते हुए कहा।
उसकी बात सुनते ही रिचा की बेबसी का बांध टूट गया। वह उस अनजान शख्स के सामने अपने आपको रोने से रोक नहीं पायी। अपनी पलकों की बूंदों को समेटते हुए उसने कहा, “डांस कॉम्पटीसन में ऑडिशन के लिए आई थी, लेकिन मेरा सिलेक्शन नहीं हुआ।”
“तो इसमें इतना दुखी होने की बात क्या है?” उस शख्स ने जवाब में कहा।
“दुखी इसलिए हूँ क्यूँ कि यह मेरे लिए आखरी मौका था, अब मेरी उम्र नहीं रही…” रिचा ने अपने आप को सँभालते हुए कहा।

रिचा और वह शख्स बाते करते करते आगे बढ़ गए। दोनों साथ ही चल रहे थे।
“नहीं किसने कहा, यह आखरी मौका था, अभी तो दिल्ली के ऑडिशन बाकी हैं…” उस शख्स ने रिचा को समझाते हुए कहा।
“पर आपको…” रिचा के कहने से पहले ही वह शख्स उसकी बात समझ गया और उसे टोकते हुए बोला, “मैं भी उसी ऑडिशन से आ रहा हूँ और मेरा भी सिलेक्शन नहीं हुआ है। वैसे मैं दिल्ली जा रहा हूँ। होपफुल्ली आपसे मुलाकात होगी।”
रिचा ने हल्की आवाज में जवाब दिया, “देखती हूँ, लेकिन…. थोड़ा मुश्किल है।”

दोनों अब तक बस स्टैंड पर पहुँच चुके थे। बस शख्स थोड़ी देर बाद आई बस में चढ़ा और वहाँ से चला गया। बस आगे बढ़ गयी और रिचा बस को जाते हुए सिर्फ यही सोंचती रही कि कौन था यह शख्स कोई इन्सान या फ़रिश्ता जो जाते जाते ख्वाबों का चिराग एक बार फिर से जला गया।

“अरे जरा देखकर, अभी एक्सीडेंट हो जाता आपका…” किसी ने रिचा को पीछे से खीचते हुए कहा। रिचा ने मुरझाये चेहरे से उस शख्स की ओर देखा और किसी बेजान लाश की तरह आगे बढ़ गयी। उस शख्स को रिचा का बर्ताव थोड़ा अजीब लगा। उसने रिचा को पीछे से आवाज देते हुए कहा, “अरे जरा सुनिए तो, लगता है आप किसी बात से परेशान हैं?” रिचा उसे अनसुना करके आगे चली जा रही थी। उस शख्स ने रिचा को कई बार टोकने की कोशिश की लेकिन रिचा ने ध्यान नहीं दिया।

उस शख्स ने एक बार फिर कोशिश की, तो रिचा ने झल्ला के कहा, “आपकी प्रॉब्लम क्या है? क्यूँ आप मेरे पीछे पड़े हैं?”
“प्रॉब्लम मेरी है या आपकी? जो इतनी रात गए अकेले सूनसान सड़क पर आप चले जा रही हैं।” उस शख्स ने लगभग डांटते हुए कहा।
उसकी बात सुनते ही रिचा की बेबसी का बांध टूट गया। वह उस अनजान शख्स के सामने अपने आपको रोने से रोक नहीं पायी। अपनी पलकों की बूंदों को समेटते हुए उसने कहा, “डांस कॉम्पटीसन में ऑडिशन के लिए आई थी, लेकिन मेरा सिलेक्शन नहीं हुआ।”
“तो इसमें इतना दुखी होने की बात क्या है?” उस शख्स ने जवाब में कहा।
“दुखी इसलिए हूँ क्यूँ कि यह मेरे लिए आखरी मौका था, अब मेरी उम्र नहीं रही…” रिचा ने अपने आप को सँभालते हुए कहा।

रिचा और वह शख्स बाते करते करते आगे बढ़ गए। दोनों साथ ही चल रहे थे।
“नहीं किसने कहा, यह आखरी मौका था, अभी तो दिल्ली के ऑडिशन बाकी हैं…” उस शख्स ने रिचा को समझाते हुए कहा।
“पर आपको…” रिचा के कहने से पहले ही वह शख्स उसकी बात समझ गया और उसे टोकते हुए बोला, “मैं भी उसी ऑडिशन से आ रहा हूँ और मेरा भी सिलेक्शन नहीं हुआ है। वैसे मैं दिल्ली जा रहा हूँ। होपफुल्ली आपसे मुलाकात होगी।”
रिचा ने हल्की आवाज में जवाब दिया, “देखती हूँ, लेकिन…. थोड़ा मुश्किल है।”

दोनों अब तक बस स्टैंड पर पहुँच चुके थे। बस शख्स थोड़ी देर बाद आई बस में चढ़ा और वहाँ से चला गया। बस आगे बढ़ गयी और रिचा बस को जाते हुए सिर्फ यही सोंचती रही कि कौन था यह शख्स कोई इन्सान या फ़रिश्ता जो जाते जाते ख्वाबों का चिराग एक बार फिर से जला गया।

वक़्त और ख्वाब दोनों एक जैसे ही तो होते हैं। अगर दोनों को पंख लग जयेईन तो दोनों ही कब कहाँ पहुँच जायें कुछ कहा नहीं जा सकता। पंख तो दोनों को लग गये थे, वक़्त को भी और ख्वाबों को भी.. वक़्त तो पंख लगा कर उड़ गया लेकिन, ख्वाबों की उड़न अभी बाकी थी। पूरे एक साल की कड़ी मेहनत के बाद रवि और रिचा के डांस सिखाये बच्चे डांस बीट्स के ग्रैंड फिनाले के स्टेज पर थे।

उन बच्चों से ज्यादा नर्वस तो रवि और रिचा थे। उनके सपनों ने अपनी शक्ल ही तो बदली थी बाकी सपना तो पुराना ही था। उनका बर्षों पुराना ख्वाब अब पूरा होने वाला था। परफॉरमेंस के बाद अब वक़्त था रिजल्ट का, अब तक जो नहीं हुआ था, उसके हो जाने की उम्मीद थी। कुछ देर बाद ही, मेंटर होने की वजह से जीती हुई ट्राफी रिचा और रवि के हांथों में थी और उनकी आँखों में जीत के आँसू…

जज के साथ उस महफ़िल में मौजूद एक खास मेहमान हो रवि और रिचा की मेहनत भा गयी थी। वह कोई और नही बल्कि बॉलीवुड की बहुत ही मशहूर हस्ती साहिर खान थे। साहिर को वह दोनों इतने भा गये कि वह उनसे बात करने से खुद को भी नहीं रोक पाए।
“आप लोग इतना अच्छा डांस सिखाते हो तो वाकई आप भी बेहद उम्दा डांस करते होगे। ” साहिर ने कहा।
“जी, हाँ,,,,” रवि और रिचा दोनों ने एक साथ जवाब दिया।
“मेरे लिए डांस करोगे ?” साहिर ने तुरंत पूंछा।
“मतलब..” रिचा और रवि को कुछ समझ नहीं आया।
“आज से लगभग एक महीने बाद एक अवार्ड शो होने वाला है, मैं चाहता हूँ कि तुम दोनों उसमे परफॉर्म करो….” साहिर ने उन्हें समझाया।

वे दोनों हँसते, खुश होते, शोर मचाते क्या करते, इतनी खुशी एक साथ मिली कि शायद जान भी चली जाती तो उन्हें गम न होता।
“ठीक है सर, हम तैयार हैं। ” दोनों ने बड़ी ही खुशी से कहा।
“लेकिन तुम दोनों को साबित करना होगा कि तुम दोनों उस मंच पैर परफॉर्म करने के लायक हो।”
“जी जरुर सर, थैंक यू वेरी मच सर…”

दोनों ही बहुत खुश थे। अगले ही पल दोनों ने शो के लिए तयारी शुरू कर दी। अब तो वक़्त था, ख्वाबों के पंख लगा ऐसी दुनियां में उड़ जाने का जहाँ सिर्फ खुशियों और ख्वाबों के अलावा कुछ न हो। जैसे जैसे तैयारी का जोर बढ़ता जा रहा था, वैसे ही वैसे रवि और रिचा एक दूसरे के करीब आते जा रहे थे। अब उनका रिश्ता ख्वाबों के साथ ही एक नया मोड़ लेने को तैयार था। तैयारियां शुरू तो हो गयी थी, लेकिन अभी भी इस बात का फैसला नहीं हुआ था कि ऐसा क्या तैयार किया जाये कि लोगों को देखते ही प्यार हो जाये। प्यार… यही एक एह्सास तो था जो इन सबके बीच अपनी जगह बना रहा था। हर एक लम्हें में प्यार किसी न किसी तरह से मौजूद रहता था।

कभी रवि की बातों में तो कभी रिचा की आँखों में… दोनों कब का एक दूसरे के करीब आ चुके थे, अब तो उस मोड़ लेते नए बेनाम से रिश्ते को एक नाम देने की बारी थी। ऐसे ही प्रैक्टिस के दूसरे दिन रिचा ने कहा, “यार सिर्फ सालसा ही क्यूँ?”
“क्यूँ कि इसमें प्यार है और लोग हमारी परफॉरमेंस तभी पसंद करेंगे जब उन्हें इससे प्यार होगा तो परफॉरमेंस में प्यार का होना जरूरी है।” रवि ने हँसते हुए कहा।
“लेकिन मुझे तो सालसा करना ज्यादा नहीं आता है।” रिचा ने अपनी परेशानी बताई।
“अरे उसमे टेंशन की क्या बात है, सिर्फ कदम से कदम ही तो मिलाने हैं।” रवि ने रिचा को समझाया, साथ ही आगे बोला, “मेरे साथ तो कदम से कदम मिला ही सकती हो…”
“लेकिन पेर्फोर्मस में जान कैसे आएगी?” रिचा ने आगे पूंछा।
“बस कुछ नहीं मेरी आँखों में देख, मेरे क़दमों के साथ साथ बस कदम मिलाती रहो।” रवि ने अपना हाँथ उसकी ओर आगे करते हुए उसे डांस के लिए बुलाया।

रिया ने उसका हाँथ थाम लिया और दोनों ने डांस करना शुरू कर दिया। डांस करते करते जैसे ही रिचा उसकी बाँहों में यूँ आई कि उस्न्की आँखें एक दूसरे के सामने थी, तभी रवि ने हल्की आवाज में रिया के कान में कहा, “लेकिन हाँ परफॉरमेंस मैं जान लाने के लिए दिल से डांस करना जरुरी है, तो भी फीलिंग्स के साथ..”
“तब तो लगता है, ओरिजिनल फीलिंग्स की डालनी पड़ेगी।” रिया ने अपने होंठों को दांतों से दबाते हुए।
“हम्म्म्म… शायद…” रवि ने जवाब दिया।

देखते ही देखते लगभग एक महिना होने को था। अब बस दो दिन ही बचे थे, जब उनकी परफॉरमेंस होने वाली थी। बीते दिनों में रिचा और रवि बेहद करीब आ गये थे। तब तो उनके क़दमों को भी एक साथ चलने की आदत पड़ गयी थी। बस कुछ घंटों बाद दोनों की जिंदगी बदलने वाली थी कि तभी कुछ ऐसा हुआ जिसके बारे में शायद खुद रिचा और रवि ने भी कभी नहीं सोचा था।

एक अनजान एहसास दिल के दरवाजे पर दस्तक देने को तैयार था। जैसे जैसे दिन बीतते गए नज़दीकियों ने दिल में ऐसा असर किया कि रवि का दिल रवि का न रहा। उसे इस बात का एहसास भी हुआ तो अवार्ड फंक्शन से बिकुल एक दिन पह्ले…

आँखों में ख्वाब और दिल में प्यार का एहसास दोनों ही एक साथ थे। शायद रवि और ऋचा के ख्वाब ही थे जो उन्हें करीब लए। इतना करीब कि शायद अब वे खुद भी अलग नहीं रह सकते थे। सिर्फ रवि ही नहीं रिचा भी इस एहसास को जी रही थी। परफॉरमेंस के एक रात पहले जब दोनों रिहर्सल हाल में थे। तब रिचा ने आँखें बंद करके लेते हुए कहा, “कल शायद हमारी ज़िंदगी बदल जाएगी या शायद नहीं भी…”

“हाँ, शायद…” रवि ने बेमन से जवाब दिया।
“और अगर हम परफॉर्म नहीं कर पाये तो…??” रिचा ने करवट लेते हुए रवि की तरफ देखकर कहा।
रवि ने रिचा की बातों पर ध्यान नहीं दिया बल्कि वह तो अपने दिल की गुत्थी में उलझा कहीं खोया हुआ था।
“अरे कहाँ खोये हुए हो?” रिचा ने एक बार फिर रवि को टोका।
“हमम.. क्या? कुछ कहा क्या तुमने?” रवि ने अपने होश सँभालते हुए कहा।
“कहाँ खोये हुए हो तुम?” रिया ने फिर से सवाल किया।
“कहीं नहीं, अभी चलते हैं, ठीक है? कल मिलते हैं….” रवि ने कहा और वहां से चला गया।

रात बीत गयी और अगला दिन उम्मीदों के साथ दस्तक देने को तैयार खड़ा था। रवि अपने दिल का फैसला कर चुका था। और शायद रिचा भी यह बात समझ गयी थी या शायद नहीं भी। रवि ने सबके सामने स्टेज पर रिचा को अपने दिल की बात बताने का फैसला किया। वक़्त गुजरा और परफॉरमेंस भी लगभग ख़त्म हो गयी, म्यूजिक भी अब बंद होने को था। चारों ओर सिर्फ और सिर्फ तालियां बज रहीं थी, उन्होंने सबका दिल जीत लिया था।

लेकिन अब वक़्त था, रिचा का दिल जीतने का, परफॉरमेंस ख़त्म होने के तुरंत बाद ही रवि ने रिचा को बाँहों में लेते हुए उसके कान में धीरे से कहा, “क्या ज़िंदगी भर मेरे साथ कदम मिला कर चल सकती हो?” रिचा ने हलके से हाँ में सर हिलाया और रवि के गले से लग गयी। देखते ही देखते दोनों तालियों की गूंज में कहीं खो से गए।

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