क्रेजी दिल | अमन सिंह

दिल को समझ पाना किसी के बस की बात नहीं… कब कहाँ इस दिल में कौन सा ख्याल आ जाये ये भी कह पाना थोडा मुश्किल ही है।

जब कभी भी मुझे वक़्त मिलता है तो मैं अपने दिल को समझने की कोशिश करता हूँ पर..!! मेरे हाँथ सिर्फ और सिर्फ हार ही आती है. दिन की शुरुआत से लेकर शाम ढलने तक इस दिल में अनगिनत ख्याल आते हैं। फिर जैसे-जैसे दिन ढलता जाता है, सारे ख्याल धुंधले से पड़ने लगते हैं।

लेकिन ये कमीना दिल अपनी हरकतों से बाज नहीं आता है और हमेशा ही हमें किसी न किसी मुश्किल में डाल ही देता है, अभी कल की ही बात है, मैं घर से कुछ दूरी पर ही पहुंचा था कि एक जाना पहचाना सा अनजाना चेहरा नज़र आ गया और फिर दिल के किसी कोने में धुंधली पड़ी सारी यादें ताज़ा हो गयीं।

नज़रों ने उस अनजान चेहरे को निहारा, आँखें अपना काम कर रहीं थी कि तभी दिल ने कहा कि ये तो वही चेहरा है जिसे….!! तभी नज़रों ने दिल को टोका और कहा आज तू फिर से वही गलती कर रहा है जो तूने पहले भी की है….!! तभी दिल ने नजारों से ये कहते हुए उसे चुप करा दिया की मेरी क्या गलती है? सारा कुसूर तो तेरा है, तू क्यों बार बार उसे देखता है।

दिल और नज़रों की इस जंग में आखिर नज़रों ने बाजी मार ही और दिल में ये इल्जाम लगा दिया कि ये दिल ना तेरा ना मेरा….!!

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