A Conversation with My BB* Blackberry Mobile | Mid Night Diary | Raghv Bharat

अ कन्वर्सेशन विथ माय बीबी ब्लैकबेरी | राघव भरत

अनुज बधू भगिनी सुत नारी । सुनु सठ कन्या सम ए चारी ॥

इन्हहि कुदृष्टि बिलोकइ जोई । ताहि बधें कछु पाप न होई ॥

सूर्या देव जब धरती पर अपने आने के संकेत दे रहे थे मैं श्री रामचरित मानस सुन रहा था , अचानक मेरी BB* पर किसी ने WhatsApp के माध्यम से मुझे सूचित किया के आज ‘ Happy Women’s Day है !

कानों में उपर लिखी चौपाई गूँज रही थी और मैं मुस्कुरा रहा था 🙂

जो आज भी इस देश में सुरक्षित नही उसकी खुशी का दिन आज सभी मनाएँगे .

१२ बजते बजते ऐसे संदेशों का ढेर मेरी BB* के सर पर था और बेचारी ३ बार बेहोश हो गयी 🙂

जब जागी तो कहने लगी , यार ये क्या तरीका है लोगों का, साल भर तो याद नही करते कभी , इनको ३६४ दिन क्या हो जाता है तब इन्हे ‘ महिलाओं ‘ की खुशी का कोई ध्यान नही आता ?

हमने कहा तुम कह तो सही रही हो पर इस देश में सब ऐसे ही होता है , यहाँ सब हवा के रूख़ के हिसाब से होता है !

मतलब ?

मतलब ये के आज Women’s Day है उसे मना लो , कल Mother’s Day , फिर Father’s Day और ना जाने ऐसे कितने दिन .

क्या समझे तुम ?

मैं तो कुछ भी नही समझी ? मुझे कहाँ आँखे पढ़नी आती हैं 😛

“देखो अभी नवरात्रि आने वाली हैं , पूरी दुनिया मां दुर्गा की आराधना में तन- मन धन से लग जाएगी , जैसे अभी महाशिवरात्रि पर हुआ था , पूरे साल जो लोग जल चढ़ाने भी ना गये वो उस दिन दूध चढ़ाने को सुबह से शाम तक लाइन में लगे थे ” 🙂

भगवान भी परेशान 🙂

साल भर की प्रार्थनाएँ एक दिन में सुन रहे थे 🙂

पर तुम तो नही गये थे ? BB* ने कहा !

अरे मैने सोचा मेरे और उनके बीच संवाद तो हर दिन हो जाता है आज इन सब को सुना लेने दो 🙂

वैसे ही आज Women’s Day है तो सब शुभ कामनाएँ देकर इति श्री कर लेना चाहते हैं कल सुबह किसी को कुछ याद नही रहेगा 🙂

कल फिर सब वही करेंगे जो बीते दिन में कर रहे थे , ना कोई मान- सम्मान देगा ना कोई कुछ कहने और करने की आज़ादी देगा. और कहीं कुछ ग़लत हो रहा होगा तो आँखे मूंद कर चलते बनेंगे !

कल फिर आँखो से X-RAY होंगे , कल फिर आगे जाते लोगों की गर्द्ने ९०* डिग्री पर घूम कर अपने शारीरिक ज्यामिति में दक्ष होने का प्रदर्शन करेंगी 🙂

जो सबसे बढ़िया काम हम आज के दिन करते हैं वो ये है के हम सब खुद में बुद्धिजीवी बनकर उनके रहन सहन उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का विश्लेषण करने लगते हैं ?

हम बात करते हैं अपने देश और संस्कृति की और उसकी तुलना इस्लामिक देशों में रहने वाली महिलाओं के साथ कर के खुद को गौरवान्वित महसूस करते हैं के चलो भाई उतनी बुरी हालत नही है , पर क्या हक़ीकत में ऐसा है ?

क्या हमने उन्हे वो आज़ादी दी है , क्या हमारे यहाँ उन्हे वो सब आज़ादी है जो उन्हे वहाँ नही मिली है ?

क्या हम यहाँ उनके कपड़ों पर उंगली नही उठाते ? क्या हम उन्हे अपने घरों में क़ैद नही रखते ?

ये कैसी आज़ादी है जहाँ एक आदमी शादी के बाद अपने पुराने दोस्तों के संपर्क में रह सकता है पर एक लड़की ऐसा करे तो पूरा घर धर्म और मर्यादा की बात करने लगता है ?

और अगर आपको सच में उनके पहनावे से दिक्कत नही है तो फिर आप क्यूँ चाहते हैं के महफ़िल में आपके साथ जाते वक़्त उनका पहनावा कैसा होना चाहिए ? मैने BB* से कहा

आप को क्यूँ बाज़ार में हर बिकने वाले सामान में उनकी ज़रूरत है ? वहाँ कोई शर्म नही महसूस होती ? क्या शानदार दोहरी मानसिकता है ना 🙂

या ये कहूँ के कहीं ना कहीं मन के किसी कोने में आप भी उन्हे देखना ऐसे ही चाहते हैं 🙂

पर उस शख्स से हमारा ताल्लुक नही होना चाहिए 🙂

मतलब दूसरे का है तो कलेजे को ठंडक और हमारा है तो अनैतिकता और आवंडर का चोला 🙂

हम बात करते हैं उनकी आज़ादी की उनके अधिकारों की पर एक बात जो नही करते वो है स्वाभिमान हम अपने अभिमान में इस कदर डूबे रहते हैं के हमारा ध्यान ही उधर नही जाता !

कुछ गोष्ठिया आयोजित कर लेने से कुछ समारोह में अगर उन्हे सम्मानित करने देने से वो हॅपी – हॅपी हो जाती हैं तो यक़ीनन हम एक ऐसे मूर्खता भरे संसार में रह रहें हैं जिसकी बागडोर अभिमानी मूर्खों के हाथ में है !!

संभव है के कुछ लोगों के लिए मैं भी उनमें से एक हूँ 🙂

सुनो तुम्हे अपना एक अनुभव बताऊं मैने कहा BB से 🙂

बीते पिछले साल में मैं ऐसे कई लोगों से मिला जो अपनी नयी ज़िंदगी के आरंभ की ओर अग्रसर थे …….. 🙂

और वो एक ऐसा साथ चाहते थे उन्हे जो मानसिक रूप से साथ दे पाए या नही पर आर्थिक रूप से ज़रू र दे 🙂

खैर इस में कोई खराबी नही है पर ऐसा होने की वजह जो उन्होने बताई वो मेरी हृदय की वेदना को बढ़ाने के लिए काफ़ी थी !

क्यूँ ऐसा क्या कह दिया ?

उनका कहना था कल गर मेरा काम ना चले तो कम से कम भूखे मरने की नौबत ना आए 🙂

उन्होने ऐसा कहा मैने सुना , प्रणाम करा और वहाँ से चल दिया 🙂

अब जब हम ऐसे मुखर विचारों को सुनते हैं तो सिर्फ़ सर झुका कर ये सोचते हैं के ऐसे वक़्त में ऐसे लोगो का पौरष कहाँ चला जाता है ? 🙂

ह्मम म म सही कह रहे हो तुम BB* ने कहा …..!

और ये वो लोग होते हैं जो खाने में नमक ज़्यादा होने पर घर में कोहराम मचा देते हैं BB ने कहा 🙂

अरे किसी दिन खुद बना कर देखो तो पता चले हाथ कैसे जलता है 🙁

तुम भी खाना बना लेते हो मैने BB* से पूछा 🙂

हाँ पर मेरे हाथों में तुम्हारी माँ के हाथों वाला स्वाद नही ना इस लिए नही खिलाया कभी 😛

अरे तो क्या हुआ दिल में प्यार तो है माँ वाला कभी वो ही कर लिया करो 🙂
मैने कहा

कुछ नही हो सकता तुम्हारा 🙂 ईडियट

सुनो ऐसा ना कहा करो ये लाइन मैं सुन सुन के थक गया हूँ , के आख़िर होना क्या चाहिए मेरा 🙂

तुम नही समझोगे राघव 🙁

क्यूँ तुम्हे भी कुछ – कुछ होता है क्या 🙂

ओ हैलो ….. अभी बजेगा ना एक कनटाप कान के नीचे भूत उतर जाएगा कक्क कक्क ख़ान का 😛

अच्छा ये बताओ ये जो उपर तुमने चौपाई लिखी है इसका क्या अर्थ है ?

अब ये ना पूछो तो बेहतर है , लोग इसका ग़लत फायदा उठा लेंगे और कहेंगे ‘ राघव ‘ ने समझाया था 🙂

अरे पर सिंपल – सिंपल वर्ड्स में तो कह सकते हो तुम 🙂

ये उन लोगों के लिए हैं जो मेरे साथ चलने वालो को सम्मान की नज़रो से नही देख पाते 🙂

मैं एक ऐसी विचारधारा पर चलने वालों में से हूँ जिसमें लड़की अपने प्रथम १० वर्षों में अपने पिता के सार – संभार में रहती है और उसके बाद शादी तक अपने भाई की और उसके बाद अपने पति की और फिर अपने बच्चों के !

और जब इस सोच में कोई दखलंदाज़ी होती है तो हम जैसे लोग इस चौपाई के माध्यम से उन्हे समझाते हैं 🙂

मैं जानती थी तुम्हारे पास वैसे भी अब ना तो XOXOXO है ना सादिक़ हैं, तो तुम इन पर ही लिखोगे ना 🙂

अब ये क्या बात हुई ?

सीधी -साधी तो हैं फिर थोडा बहुत पागल – पन तो सब में होता है XOXOXO और सादिक़ में भी था 🙂

उनके एरोप्लेन हर उस जगह उड़ते थे जहाँ ज़रूरत नही होती थी 🙂

वैसे भी वो मुझे सिर्फ़ उनके द्वारा करे हुए संघर्ष की वजह से याद हैं , मज़ाक है क्या किसी लड़की के लिए शादी का टूट जाना और फिर अकेले ज़िंदगी को जीना !

इस चौपाई का साधारण अर्थ है के ,

आप की और हमारी सभी की नैतिक ज़िम्मेदारी है उन्हे ‘ सुरक्षित’ रखना उनमें सुरक्षा की भावना का संचार करना , उन्हे इस बात का अहसास दिलाना के आप उनके साथ हैं और आप के होते उनके साथ कुछ भी ग़लत नही हो सकता ना घर में ना घर के बाहर , और अगर आप समझते हैं के आप ऐसा कर सकते हैं तभी आप इस दिन ‘ Happy Women’s Day के अर्थ को सही मायनों में ‘सार्थक’ कर पाएँगे !

चलता हूँ आज यहाँ आया हूँ तो खुद से भी मिल लूँ 🙂

जो कहा है अगर समझ में आए तो अमल में लाने की कोशिश करिएगा वरना अगले साल फिर यूँ ही मना लीजिएगा

-राघव भरत

 

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