Chura Le Gaye | Mid Night Diary | Amrit

चुरा ले गए | अमृत

सहर की ओट से शब चुरा ले गए,
वो मस्जिदों से मजहब चुरा ले गए,

गाँव लौटा तो शहर पसरा पाया
धीरे धीरे कर के सब चुरा ले गए

चौकीदार बन दरवाजे पे खड़े थे जो,
पता भी न चला क्या कब चुरा ले गए

तरक्की के नाम गिरवी रखे लम्हे
हाथ मे जाम दे तलब चुरा ले गए

मुँह बंद कर सामने थाल रख दी
शातिर मंजिल दे सबब चुरा ले गए।

 

-अमृत

बेजान रिश्ता अमृत राज
Amrit

Share on FacebookTweet about this on TwitterShare on Google+Share on TumblrShare on LinkedInPin on PinterestEmail this to someone

124total visits,1visits today

Leave a Reply