चार्मिंग चीटर | अमन सिंह | #एंडलेसजर्नीऑफ़ मेमोरीज

“तुम सुधरने का क्या लोगे..” स्वाति ने झल्लाते हुए अनुराग से कहा।
“बस कुछ नहीं कुछ हसीं लम्हें, दो किस्से और एक प्यारी सी मुलाकात…” अनुराग ने बड़े ही प्यार से स्वाति को समझाते हुए कहा।

“ऐसा नहीं हो सकता, इतनी बार मना करने के बाद भी तुम्हें यह बात क्यूँ समझ नहीं आती.. कि मैं तुम्हे प्यार तो छोड़ो, रत्ती भर पसंद भी नहीं…” अभी स्वाति बोल ही रही थी कि अनुराग ने उसकी बात को काटते हुए बोला, “पता है कि तुम न ही मुझे प्यार करती हो न ही पसंद करती हो… लेकिन फिर भी मैं तुमसे प्यार करता हूँ और करता रहूँगा, मैंने माँगा ही क्या है तुमसे.. सिर्फ एक मुलाकात.. बस मैं और तुम…. और कुछ नहीं”

अनुराग अभी बोल ही रहा था कि स्वाति ने यह कह कर फ़ोन काट दिया कि ऐसा हरगिज़ नहीं हो सकता। लगभग २० मिनट के बाद जब अनुराग प्यारे ख्वाबों की दुनिया में खोने वाला था तभी उसके मोबाइल पर स्वाति का मैसेज आया, “ठीक है, मैं सोचती हूँ.. तुमसे मिलने के बारे में…”

मैसेज पढ़कर अनुराग ने मैसेज का जवाब देना चाहा लेकिन फिर मन में कुछ सोचकर चुपचाप बिना जवाब दिए मुस्कुराते ख्वाबों की करवट लेकर सो गया। अगली सुबह का उसे बेसब्री से इन्तजार था। अगली ही सुबह उठने के बाद अनुराग तैयार हुआ और स्वाति के घर की तरफ बढ़ गया।

हर रोज़ की तरह स्वाति के घर पास पहुंचकर, सबसे पहले उसने स्वाति के हँसते खिलखिलाते चेहरे को देखा फिर उसके बाद हर बार की तरह बिना कुछ कहे, बिना कुछ बोले एक गुलाब का फूल उसके घर की चोह्खट पर रखकर बापस लौट आया।

वापस आने के बाद उसने स्वाति को फोन करके यह जानने की कोशिश की, कि उसने क्या सोचा या उसका क्या फैसला है? लेकिन स्वाति ने उसके फ़ोन का कोई जवाब नहीं दिया, बल्कि यह कह कर फ़ोन रख दिया कि वह अभी बिजी है बाद में बात करेगी।

खैर अनुराग ने कुछ नहीं कहा, और देखते ही देखते जवाब से इन्तजार में कई दिन गुजर गए। अनुराग अपनी रोजमरहा की जिन्दगी में व्यस्त हो गया। जिन्दगी अपनी रफ़्तार से बढ़ ही रही थी कि तभी अचानक एक दिन स्वाति का फ़ोन आया और उसने अनुराग से कहा, “आने वाले अगले शुक्रवार को वह उससे मिलने के लिए तैयार है लेकिन सिर्फ चार घंटे के लिए..”

अब अनुराग को बेसब्री से सिर्फ और सिर्फ अगले शुक्रवार का इन्तजार था, जो अभी भी पूरे चार दिन, सात घंटे और चालीस मिनट उसकी पहुँच से दूर था।

शुक्रवार, खैर देर से ही सही लेकिन वह दिन भी आ गया, जिसका इन्तजार शायद अनुराग को अपने जन्मदिन से भी ज्यादा था। स्वाति के पसंदीदा रंग की शर्ट, मैचिंग के जूते, बालों में जेल, ब्रांडेड चश्मा और महंगा वाला परफ्यूम लगाकर.. वह स्वाति से मिलने के लिए निकल पड़ा। उस दिन उसे जो भी मिला, जिसने भी उसे देखा, एक बार टोककर पूछ ही लिया कि क्या बात है? आज इतनी चमक कहाँ से आ गयी।

अब इसे बेचैनी कहा जाये या उसकी दीवानगी कि वह वक़्त से पूरे चालीस मिनट पहले ही पहुँच गया और हर दूसरे मिनट में अपनी कलाई पर बंधी अपने दोस्त कि नयी घड़ी को देखता।

स्वाति आई और उसने आते ही यह शर्त रख दी कि सिर्फ चार घंटे के लिए वह उसके साथ है उससे एक सेकंड भी ज्यादा नहीं। अनुराग ने जवाब दिया, “कि चलो चार घंटे ही सही, लेकिन वादा है.. इन चार घंटों में तुम अपनी जिन्दगी के सबसे यादगार पल जी लोगी जो तुम कभी नहीं भूल पाओगी।”

“अच्छा ऐसा है क्या?” स्वाति ने अनुराग से पूंछा।
“अभी बस तुम देखती जाओ मैं क्या करता हूँ…” अनुराग ने स्टाइल मारते हुए कहा।
“बता रहे हो या फिर मैं जाऊं…” स्वाति ने उसी पुरानी अकड़ के साथ कहा।
“ठीक है.. ठीक है… बताता हूँ, परेशान क्यूँ हो रही हो, लेकिन पहले वादा करो कि इन चार घंटों में मैं जो करूँगा, जो कहूँगा तुम मेरा साथ दोगी.. बोलो मंजूर?” अनुराग ने बड़े ही हल्के अंदाज में कहा।

कुछ देर सोचने के बाद स्वाति ने जवाब दिया, “हम्म… ठीक है।”
“देखो अभी मेरे पास मेरी जेब मैं सिर्फ और सिर्फ यह १०० रुपये हैं। मैं इन १०० रुपयों में तुम्हें इस शहर कि सबसे खूबसूरत ड्रेस पहनवाऊंगा, इस शहर के सबसे महंगे रेस्त्रों में खाना खिलाऊंगा और तो और इस दुनिया का सबसे खूबसूरत और कीमती तोहफा तुम्हें दिलाऊंगा।”

“अगर ऐसा नहीं हुआ तो…” स्वाति ने उसे टोकते हुए कहा।
“और अगर ऐसा हो गया तो…” अनुराग ने उलटे ही उससे सवाल कर लिया।
स्वाति ने कोई जवाब नहीं दिया और बिना कुछ कहे आगे बढ़ गयी, और अनुराग उसके पीछे चल दिया।

“तो सबसे पहले हम चलेंगे वहां जहाँ तुम इस शहर की सबसे खूबसूरत ड्रेस पहनोगी…” अनुराग ने कहा और स्वाति को बस में चढ़ने का इशारा किया।
बस का सफर वाकई और खूबसूरत हो जाता है, अगर वो साथी आपके साथ हो जिसे आप प्यार करते हैं। बस में काफी भीड़ थी न चाह कर भी स्वाति और अनुराग के दूसरे के बेहद करीब थे। स्वाति ने कई बार कोशिश की लेकिन खुद को दूर नहीं कर पायी। दोनों की नज़रें बिल्कुल एक दूसरे के सामने थी।

लगभग १५ मिनट के सफर के बाद दोनों शहर के सबसे महंगे मॉल में पहुँच गए, जहाँ पहुँच कर अनुराग ने स्वाति के लिए वह ड्रेस ली जो स्वाति को बेहद पसंद थी साथ ही, उसे एक बार ट्राई करने को कहा। “ठीक है मैं अभी चेंज करके आती हूँ… ” स्वाति ने कहा और ट्रायल रूम में चली गयी। लगभग सात से आठ मिनट बाद वो बाहर आ गयी, कितनी खूबसूरत लग रही थी वो, उस ड्रेस में.. अनुराग ने देर न करते हुए उसकी एक फोटो उसी के मोबाइल से लेकर फेसबुक पर पोस्ट कर दी। इस बात का पता स्वाति को तब पता चला जब उसे नोटिफिकेशन आने लगे।

“चलो अच्छा अभी इसे उतार कर रख दो” अनुराग ने कहा कि तभी स्वाति ने उसे टोक दिया, “क्यों? तुमने तो कहा था सबसे खूबसूरत ड्रेस पहनवाओगे….”
“हाँ तो पहन तो ली तुमने और देखो अब तो सुबूत भी है, फेसबुक पे कमेंट भी आ रहे हैं” अनुराग ने कहा।

स्वाति को उसका यह अंदाज पसंद आ गया। फिर थोड़ी देर वहीं पर बाते करने और घूमने के बाद दोनों रॉयल होटल के लिए निकल गए जो शहर से थोड़ा बाहर और दूसरे छोर पर था, फिर से वही बस का सफर और वही आँखों का मिलना, सांसो का टकराना लेकिन इस बार स्वाति को कोई तकलीफ नहीं हो रही थी, अनुराग के इतने करीब आकार….

दोनों को पहुँचते पहुँचते शाम हो गयी, खैर दोनों पहुंचे और पेट भर कर अपना मनपसंद खाना भी खाया। अब बात आई बिल देने की तो अनुराग ने एक मरा हुआ कॉकरोच जेब से निकल कर चुपचाप जूस में डाल दिया और फिर वेटर को बुला कर उससे शिकायत की, थोड़ी ही देर में मैनेजर भी आ गया.. बात करने के बाद अनुराग ने जेब से पर्श निकल पैसे देने का बहाना किया लेकिन मैनेजर ने मना कर दिया और वो दोनों शान से वहां से निकल आये। बाद में स्वाति ने उससे कई सवाल किये जिसके जवाब भी अनुराग ने अपने ही रंग में दिए। खैर स्वाति को ऐसा अनुराग अच्छा लग रहा था।

अब बात थी सबसे खूबसूरत तोहफे की तो अनुराग ने फुटपाथ पर चलते वक़्त पास की ही एक कॉस्मेटिक की शॉप से उसे एक काजल ख़रीद कर देते हुए बोला, “तुम्हारी आँखें बहुत खूबसूरत है, आज तो इन्होने मेरा क़त्ल ही कर दिया। मैं तुमसे बेहद प्यार करता हूँ। मैं तुम्हें हासिल नहीं महसूस करना चाहता हूँ। यह काजल तुम्हारी आँखों की खूबसूरती में और चार चाँद लगा देगा, साथ ही तुम्हें बुरी नज़र से भी बचाएगा। माना पैसा रुतबा सब जरूरी है, लेकिन प्यार वो कभी कम नहीं होता”

स्वाति ने उसकी बात काटते हुए कहा, “यू चीटर कॉक, सारे वादे पूरे किये लेकिन चीटिंग से… पर कुछ तो चार्म है तुममे और अब यह चेटिंग करने वाला चार्मिंग चीटर मुझे पसंद है…”

376total visits,1visits today

Leave a Reply