Chalo Bhikher Dete Hain | Mid Night Diary | Aradhana Shukla | #UnlockTheEmotion

चलो बिखेर देते हैं | आराधना शुक्ला | #अनलॉकदइमोशन

चलो आज बिखेर देते हैं,
तुम्हारे साथ बीता हर पल, हर लम्हा
मन की पिटारी से निकालकर
शायद ये उदास लम्हे फिर से खिलखिला उठें।

चलो आज तुम्हारी बातों को फिर से दोहराते हैं
तुम्हारी कह-अनकही,
सब फिर से सुनते हैं
क्या पता ये ख़ामोशियाँ बोल उठें।

चलो आज तुम्हारी फोटो,
गैलरी के हिडेन फोल्डर से निकालकर
लगाते हैं वॉलपेपर
और देखते हैं.. कि धड़कन किस हद तक तेज़ होती है।

चलो आज फिर से जीते हैं वो डर,
तुम्हे खोने का
क्या पता तुम लौट आओ
चलो आज फिर से बिना बात के मुस्कुराते हैं
क्या पता, आँखों में थमा हुआ दर्द पिघल पड़े।

चलो आज फिर तुम्हे याद करते हैं
क्या पता सिसक पड़े.. वो हँसी,
जो लब़ों पर पथरा गई है। 

तुम्हारे जाने के बाद..
पहले जैसा कुछ नहीं रहा
न तुम, न मैं और न वो वक्त
वक्त, पंख पसार कर उड़ता था
और अब सरकता भी नहीं
तुम, तुम भी बदल गये
कभी मेरी ख़ामोशी पढ़ लेते थे
अब चीखें बेआवाज़ हो गईं।

और मैं, मैं भी तो बदल गई
पहले बात-बात पर रो देती थी
अब हँसना सीख गई हूँ .. आँखों में उतरी नमी को छिपाकर।

पहले चेहरे पर अपना हाल रखती थी,
अब नकाब़ रखती हूँ .. एक मुस्कुराहट का।

तो चलो बस करते हैं …
अब समेटना-सँजोना
अब बिखर जाने देते हैं,
सारे लम्हें, सारे ख़्वाब और …ज़िन्दगी।

 

-आराधना शुक्ला

 

Aradhana Shukla
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2 thoughts on “चलो बिखेर देते हैं | आराधना शुक्ला | #अनलॉकदइमोशन

  1. आराधना दी मैं समझ नही पा रहा हूं कि इस कविता के ऊपर मैं क्या टिप्पड़ी करू..??? जितना कहा जाए उतना कम… .

  2. आपके शब्दों का चयन बहुत प्रभाव्शाली है…..प्रवाह ऐसा है के पता ही नहीं चलता

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