Category: Short Stories

A collection of Short Storeis

Short Stories

गड्तंत्र की ज़मीनी हक़ीक़त | दीप्ति पाठक | गड़तंत्र दिवस विशेष

आज 26 जनवरी ,गणतंत्र दिवस की भोर न जाने मेरे मस्तिष्क पटल पर कितनी भूली बिसरी यादों का सैलाब ले आयी हो।वो पास के ही किसी स्कूल से आते देशभक्ति के गानों की आवाज़ों सेContinue reading

Paramatma Ke Sandesh | Mid Night Diary | Raghv Bharat
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परमात्मा के सन्देश | राघव भरत

चलने से पहले आवाज़ यक़ीनन दी होगी उसने, यूँ ही कहाँ कोई ख़्वाबों में दस्तक देता है। आज नहीं कुछ दिनों बाद मिल लूंगा जाकर अभी मौसम बहुत सर्द है ,पहाड़ की बात और हैContinue reading

Halchal Almaari Ke Andar Ki | Bhavna Tirange Ki | Manjari Soni
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हलचल अलमारी के अंदर की| भावना तिरंगे की | मंजरी सोनी

”सारा सामान निकाल कर जॉंच लो और जमा दो,ध्‍यान र‍हे कल सुबह कुछ परेशानी ना हो।” जैसे ही ये आवाज़ आई अलमारी के अंदर कुछ हलचल सी होने लगी। अलमारी में रखा तीरंगा मुस्‍कुराया औरContinue reading

Intzaar Aur Bebasi | Mid Night Diary | Shweta
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इंतज़ार और बेबसी | श्वेता

ये कहानी आपको 10 साल के पीछे के दौर और एक छोटे शहर में ले जाएगी। एक ऐसा शहर जहां मां बाप लड़कियों को पढ़ाते जरूर थे लेकिन शायद ही किसी लड़की को इंग्लिश मीडियमContinue reading

Fark Padta Hai | Mid Night Diary | Aman Singh | #BenaamKhat
Benaam Khat

फर्क पड़ता है | अमन सिंह | #बेनामख़त

‘फ़र्क नहीं पड़ता है’ कहने से कितना फ़र्क पड़ता है, कभी सोचा है तुमने? हर रात जब बातों को टालकर तुम यूँ ही सोने चली जाती हो, तो कभी सोचा है तुमने या जानने कीContinue reading

Short Stories

खत तुम्हारे नाम | रौशन ‘सुमन’ मिश्रा

सुनो प्रिय तुमसे एक बात कहनी थी लेकिन हमेशा से बेकाबू दिल पे काबू करते आया हूँ| तुम्हारे घर के सामने मेरी साईकिल का चैन उतरना भले ही तुम्हे “इत्तेफाक” लगता रहा हो, लेकिन मेरेContinue reading

RAJ! Naam To Suna Hi Hoga | Roshan 'Suman' Mishra | Comedy Tadka
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राज! नाम तो सुना ही होगा | रोशन ‘सुमन’ मिश्रा | कॉमेडी तड़का

जनवरी की 5 तारीख… दूसरे दिन के अपेक्षा दूनी ठंढ़ महसूस हो रही थी सामने इतना कोहरा की हाथ भी नही सूझ रहा था इस सब के बीच स्कूल का पहला दिन…. पहला दिन काContinue reading

Lag Ja Gale | Mid Night Diary | Aman Singh
Benaam Khat

लग जा गले | अमन सिंह | #बेनामख़त

तुमने जब भी मुझे गले लगाना चाहा है, मैंने तुम्हारी बाहों में खुद को सौपने से पहले अपने हाथ खोलकर तुम्हें अपने सीने में छुपा लिया। मैं ऐसा सिर्फ इसलिये ही नहीं करता कि तुम्हारेContinue reading

Micro Tales

यह दुनिया ले देकर चलती है | जय वर्मा

बात यदि प्रेम की हो तो सभी के हृदयों में गुदगुदी होने लगती है।यहाँ प्रेम से अभिप्राय प्रणय से अर्थात स्त्री-पुरुष के आकर्षण सम्बन्धी सम्बन्धों से है। जैसे ही प्रेम की बात उठती है हरContinue reading

Micro Tales

शर्दी की एक शाम | सारांश श्रीवास्तव

सर्द मौसम था और हवा भी चुभने लगी थी अब, हालाँकि ये चुभन अच्छी भी लगती है। कोहरा और कोहरे को चीरते हुए रोज़ तुमतक आने का सुकून भी कुछ और ही होता है। रोज़ सुबहContinue reading