Category: Micro Tales

बेनाम ख़त, तेरे नाम…

Khair Chhod Do | Mid Night Diary | Aman Singh
Benaam Khat

ख़ैर, छोड़ दो | अमन सिंह

कितना आसान है यह कह देना कि ‘छोड़ दो’ शायद यह दुनिया सा सबसे आसान शब्द होगा लेकिन इसे अंजाम तक ले जाना दुनिया का सबसे कठिन काम है। सिर्फ़ कहने भर से कहाँ कुछContinue reading

Agar Hum Sab Dibbe Hote | Mid Night Diary | Aishwarya Raj
Micro Tales

अगर हम सब डिब्बे होते | ऐश्वर्या

कैसा होता अगर हम सब डिब्बे होते, और हमारा जीवन कोई पोटली, और कोई होता, जो कई पोटलियाँ कंधे पर लटकाये नगर नगर घूमता! और फिर एक रोज, एक रोज वो भूलवश उस हरी पोटलीContinue reading

Silly Baatein | Mid Night Diary | Akanki Sharma
Micro Tales

सिली बातें | एकांकी शर्मा

“भैया, आप इतनी सिली बातें कैसे कर लेते हो?” “मैंने कब कुछ सिली कहा?” “ये जो अभी………….” “”मकसद तुम्हें हँसाना होता है।” “मेरी हँसी आपको अज़ीज़ है ना?” “बहुत।” “पर मैं हँस के क्या करुँगी?Continue reading

Baaton Ki Purani Si Nayi Painting | Mid Night Diary | Aditi Chatterjee | #UnlockTheEmotion
Micro Tales

बातों की पुरानी सी नयी पेंटिंग | अदिती चटर्जी | #अनलॉकदइमोशन

बातों की पुरानी सी नयी पेंटिंग के कुछ रंग ज़रा चटकने लगे हैं, शायद मशरूफ है वो किसी दूसरे काम में… मैंने कोशिश की कुछ रंगो को और मिलाकर ठीक उसे वैसा ही करने कीContinue reading

Fark Padta Hai | Mid Night Diary | Aman Singh | #BenaamKhat
Benaam Khat

फर्क पड़ता है | अमन सिंह | #बेनामख़त

‘फ़र्क नहीं पड़ता है’ कहने से कितना फ़र्क पड़ता है, कभी सोचा है तुमने? हर रात जब बातों को टालकर तुम यूँ ही सोने चली जाती हो, तो कभी सोचा है तुमने या जानने कीContinue reading

Lag Ja Gale | Mid Night Diary | Aman Singh
Benaam Khat

लग जा गले | अमन सिंह | #बेनामख़त

तुमने जब भी मुझे गले लगाना चाहा है, मैंने तुम्हारी बाहों में खुद को सौपने से पहले अपने हाथ खोलकर तुम्हें अपने सीने में छुपा लिया। मैं ऐसा सिर्फ इसलिये ही नहीं करता कि तुम्हारेContinue reading

Micro Tales

यह दुनिया ले देकर चलती है | जय वर्मा

बात यदि प्रेम की हो तो सभी के हृदयों में गुदगुदी होने लगती है।यहाँ प्रेम से अभिप्राय प्रणय से अर्थात स्त्री-पुरुष के आकर्षण सम्बन्धी सम्बन्धों से है। जैसे ही प्रेम की बात उठती है हरContinue reading

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शर्दी की एक शाम | सारांश श्रीवास्तव

सर्द मौसम था और हवा भी चुभने लगी थी अब, हालाँकि ये चुभन अच्छी भी लगती है। कोहरा और कोहरे को चीरते हुए रोज़ तुमतक आने का सुकून भी कुछ और ही होता है। रोज़ सुबहContinue reading

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काम ख़तम | मुसाफिर तंज़ीम

रात के 2 बज रहे थे।चारों तरफ सन्नाटा और गलियों में सरकारी लाइटों का उजाला छाया हुआ था। सुमित के घर की बेल लगातार बज रही थी,ऐसा लग रहा था जैसे कोई बड़ी मुसीबत में होContinue reading

Ek Shaam | Mid Night Diary | Aman Singh | The Last Meeting
Benaam Khat

एक शाम | अमन सिंह | आखरी मुलाक़ात

याद है तुम्हें, कुछ हफ्तों पहले.. शाम के वक़्त साथ बैठे हुये, तुमनें मेरा हाथ अपने हाथ में ले लिया था और मैं बिना एक लफ्ज़ कहे, आँखों के अश्क़ों से कितना कुछ कह गयाContinue reading