Category: Poetry

Wo Darti Hai | Mid Night Diary | Uttam Kumar
Poetry

वो डरती है | उत्तम कुमार

वो डरती है। साथ किसी के रहने से,साथ किसी के चलने से, साथ किसी के होने से,साथ किसी के जीने से, वो डरती है। बात किसी से करने से,बात किसी का सुनने से, बात किसीContinue reading

Wo Bachpan Ab Bhi Yaad Hai Mujhe | Mid Night Diary | Prajjval Nira Mishra
Poetry

वो बचपन अब भी याद है मुझे | प्रज्ज्वल नीरा मिश्रा

जब सुबह सुबह, चाय गैस पे होती थी और माँ गुसलखाने में। हर रोज़ की तरह धीमी आंच पर यूँ ही चाय खौल रही होती थी। पापा आवाज पे आवाज लगा रहे होते थे। -“अरेContinue reading

Nar Sanhaar Ab Band Karo | Mid Night Diary | Anubhav Kush
Poetry

नर संहार अब बंद करो | अनुभव कुश

गोली से, तोपों के गोलों से घर टूटे पक्के पक्के, रोटी को और छाया को तड़प रहे सारे बच्चे। सारे फसाद की जड़ वहां उपस्थित संसाधन हैं, जान गंवाते घूम रहे बच्चे भी तो सबकाContinue reading

Wo Kahte Hain Main Galat Hun | Mid Night Diary | Aditi Chatterjee
Poetry

वो कहते हैं मैं ग़लत हूँ | अदिति चटर्जी

वो कहते हैं मैं ग़लत हूँ… क्योंकि मैंने अपने इर्द- गिर्द अपना ज़ोन बनाया, जो उनके बनाये ज़ोन पर एक काँच की पतली परत बना देता है उनके रेंगते मोटे काले साँप सा रूढ़ीवादी नियमContinue reading

Poetry

फिर से | उत्तम कुमार

लो आ गया तेरे शहर में फिर से, क्या होंगी कुछ मुलाकातें फिर से, मोहब्बत न हो तो न ही सही, क्या होगीं कुछ बातें फिर से? मानता हूँ कि गलतफहमी का शिकार हो गईContinue reading

Haar Kaise Maan Loon | Mid Night Diary | Musafir Tanzeem
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हार कैसे मान लूँ | मुसाफिर तंज़ीम 

अभी गिरा ही तो हूँ टूटा तो नहीं हूँ इतनी जल्दी हार कैसे मान लूँ अभी तो लड़ना शुरू किया है लड़ाई देर तक चलेगी बदन से रिसते लहू और कुछ चोटों को अपना अंजामContinue reading

Main Kalakaar Kehlata Hun | Mid Night Diary | Vishakha Kamra
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मैं कलाकार कहलाता हूँ | विशाखा कामरा | विश्व रंगमंच दिवस

मैदान हो या, हो मंच सही, हर गली-गली में भीङ खङी और देख मुझे हर पेङ-पात पर खुशहाली की लङी लङी उस लङी लङी से चुनकर कुछ चेहरों में साँसे भरता हूँ किरदारों में जीवनContinue reading

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आज भी वो तुझे प्यार नहीं करता | अनुप्रिया अग्रहरि 

आज शाम जब मैं कॉलेज से आ रही थी। फिर उसका मुस्कुराता चेहरा देखा।। उसके दिल की धड़कनों को सुना। तो लगा शायद आज भी ये मेरे लिए ही धड़कती है।। फिर उस मुस्कान मेContinue reading

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पता नहीं | अनुप्रिया अग्रहरि

पता नहीं उसके ख्यालों में मैं हूँ या नहीं। पर मेरे ख्यालों में वो हर वक़्त रहता है।। पता नहीं उसके सांसों में मेरी खुश्बू है या नहीं। पर मेरे सांसों में उसकी खुशबू हरContinue reading