बर्निग थॉट्स | अमन सिंह | #एंडलेसजर्नीऑफ़ मेमोरीज

“आई लव यू माई शोना.. डार्लिंग, माई जानू.. यू आर सो स्वीट, आई कान्ट लीव विथआउट यू…” चार दिवारी के सन्नाटे को चीरती पायल की आवाज अचानक बंद हो गयी। चारों ओर फिर से सन्नाटा था। एक हल्की पीली रोशनी में जलता बल्ब भी बस अपनी मौजूदगी का एहसास मात्र दिला रहा था।

उज्वल अभी भी बेसुध आँखें बंद किये दिवार के सहारे बैठा था। बिखरे हुए बाल बड़ी बड़ी दाढ़ी और आँखों में आँसू… वह अभी भी खोया हुआ था कि तभी फिर से पायल की आवाज फिर से आने लगी “आई लव यू माई शोना.. डार्लिंग, माई जानू.. यू आर सो स्वीट, आई कान्ट लीव विथआउट यू…” पायल अभी भी मुस्कुरा रही थी लेकिन मोबाइल की स्क्रीन पर….

रात के सन्नाटे में आती हल्की सी आवाज भी किसी लाउड स्पीकर से कम नहीं लगती, पास से आती क़दमों की आवाज से ऐसा लगा जैसे कि कोई नजदीक आ रहा है। उज्वल ने अपने होश संभाले और मोबाइल को बंद करके छिपा दिया। वह सोने का बहाना करके कम्बल ओढकर लेट गया। थोड़ी देर बाद कांस्टेबल आया, उसने उज्वल की बेरक पर नज़र डाली, कोई हलचल न होने पर उसे लगा उज्वल सो गया है तो वह चुपचाप वहाँ से चला गया।

उसके जाने के कुछ देर बाद आँखों में आँसू और पायल से कभी न मिल पाने का अफ़सोस दिल में लिए उज्वल गहरी नींद में खो गया। बड़ी ही अजीब-ओ-गरीब जिन्दगी हो गयी थी, न कुछ खाना, न कुछ पीना… सिर्फ दिन भर बैठकर पायल के बारे में सोचते रहना…

कितना अजीब है न खुद की चाहत ही खुद की चाहत से आपको दूर कर देती है। सच तो नहीं लगता लेकिन शायद उज्वल की जिन्दगी का सच अब यही है। पायल से अब भी इतना प्यार करता है कि खुद की जिन्दगी भी कुर्बान कर दे लेकिन शायाद तकदीर को कुछ और ही मंजूर था कि दोनों पास होकर भी हमेशा के लिए दूर हो गए।

बात ज्यादा पुरानी नहीं है, बस कुछ ही महीने बीते होंगे उस बकिये जब पायल और उज्जवल अलग हुए या यूँ कहें कि पायल ने अलग होने का फैसला किया था।

“कहा न मैंने तुमसे, मुझे तुमसे कोई बात नही करनी” पायल ने झल्लाते हुए कहा, “और हाँ अगली बार से फ़ोन करने की कोई जरुरत नहीं है। अगर परेशान किया तो घर वालों से कह दूंगी।”

फ़ोन अब तक कट चुका था। उज्जवल को कुछ समझ नही आ रहा था। वह जब तक कुछ कहता तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उसे यह समझ नहीं आ रहा था कि दिन रात प्यार की कसमें खाने वाली पायल को अचानक ऐसा क्या हो गया कि उसने इतनी बेरुखी कर ली। अपने ही आप में उलझा, खुद के सवालों का जवाब खुद ही देता उज्जवल चाहकर भी अपने प्यार से, पायल से बात नहीं कर पा रहा था। उसने कई कोशिशें की लेकिन पायल ने एक बार भी फ़ोन नही उठाया।

“जिस नंबर पर आप संपर्क करना चाहतें हैं, वह अभी दूसरी कॉल पर व्यस्त है, कृपया थोड़ी देर बाद कॉल करें….”

कई बार एक ही मैसेज सुनकर उज्जवल को इतना गुस्सा आ गया कि इस बार उसने अपना मोबाइल ही फेककर तोड़ दिया। मोबाइल टूट तो गया लेकिन उससे आती आवाज अभी तक अबंद नहीं हुयी थी। पायल के बारे सोचते सोचते उज्जवल उस पल में खो गया जब वह दोनों पहली बार मिले थे। चंडीगढ़, पंजाब के दिल में बसने वाले इसी शहर में ही तो दोनों के दिल मिले थे। कॉलेज के किसी दोस्त की शादी थी, जिसके चलते पहली बार उज्जवल का पंजाब जाना हुआ था। पंजाब की खातिरदारी तो आप जानते ही हैं और ऊपर से शादी का माहौल, फिर कहने ही क्या? जैसे एक ही पल में उज्जवल को चंडीगढ़ भा गया था।

“ओये की हाल हैं यारा? हुड मैं वेख रिया सी तू उस कुड़ी नू बड्डी देर से ताड़ रिया सी… हुड की गल है, दस्सो तो सही…” उज्जवल के दोस्त ने पूंछा।
“क्या?” उज्जवल चोरी पकडे जाने से घबरा गया, “यार ऐसा तो कुछ भी नही है और हाँ गुरप्रीत मेरे दोस्त, यह पंजाबी मत बोल, मेरे से पंजाबी नहीं चलती।”
गुरप्रीत ने जवाब दिया लेकिन उज्जवल का ध्यान तो उस लड़की पर ही था, उसने गुरप्रीत की बात का कोई जवाब नहीं दिया। गुरप्रीत ने उज्जवल को देखा और हल्के से मुस्कुराकर बोला, ”पायल नाम है उसका, मेरे बड़े भाई की साली है, दिल्ली में रहती है… तू चाहे तो मैं तेरी बात करा सकता हूँ।”

उज्जवल अभी भी उस लड़की में ही खोया हुआ था, वह उसे अभी भी प्यार भरी नज़रों से देख रहा था।

अगली सुबह उज्जवल तैयार होकर बालकनी पर खड़ा बहार हो रही तैयारियां देख रहा था, साथ ही पायल को भी.. कि तभी गुरप्रीत ने पीछे से आकर टोका, “यार हूँ तेरा , तू तो खुद बात करेगा नहीं, चल मैं ही बात करा देता हूँ…”
“नहीं यार…” उज्जवल ने जवाब दिया।

उज्जवल आगे कुछ कहता तब तक गुरप्रीत ने पायल को आवाज लगा दी। “ओये पायल हुड इत्थे आ, वेख कौन आया सी त्वानु मिलन वास्ते….”
“अभी आती हूँ, प्राजी….” पायल ने नीचे से जवाब दिया।
“क्या करते हो यार, डायरेक्ट ही बोल दिया….” उज्जवल ने फुसफुसाते हुए कहा। वह और कुछ कहता तब तक पायल आ चुकी थी।
“हाँ प्राजी दस्सो की होया, कौन आया मेरे नाल मिलन वास्ते ” पायल ने चहकते हुए कहा।

उज्जवल के चेहरे पर घबराहट की सिकन साफ नज़र आ रही थी।
“यह मेरा दोस्त है, दिल्ली से ही आया है। हम साथ में पढ़ते थे। तुम्हेंkal से देख रहा था तो मैंने सोचा, तुमसे मिलवा दूँ….” गुरप्रीत ने हँसते हुए कहा।
“हाँ वह तो मैं भी देख रही हूँ, कल से यह मेरे पे लाइन मारे जा रहे हैं।” पायल ने मजाक बनाते हुए कहा।
“अच्छा तुम दोनों गप्पे मारो, मैं चलता हूँ..” गुरप्रीत कह कर जाने लगा।
“लेकिन….” उज्जवल ने कुछ कहना चाहा लेकिन गुरप्रीत ने उसकी नहीं सुनी और चला गया।

“वो…वो… गुरप्रीत झूठ बोल रहा था, मैं तो बस….” उज्जवल कुछ और कहता, तब तक अपायल ने भी उसे इशारा करके चुपकर दिया।
“मैं तो कल से ही सोच रही थी कि अब इशारे से बुलाओ कि तब…. लेकिन तुम तो बिल्कुल फट्टू निकले… ” पायल ने करीब आते हुए कहा। साथ ही आगे बोली, “आज तक सुना बहुत था, आज मुलाकात हुई तो बेहद अच्छा लग रहा है।”

बात करते करते कब आधा दिन गुजर गया दोनों में से किसी को पता नहीं चला, इस बीच दोनों को कई बार आवाज दी, कभी बीजी ने बुलाया, कभी गुरप्रीत ने लेकिन दोनों किसी न किसी बहाने से साथ बैठे रहे। वक़्त गुजरा और अगले ही दिन गुरप्रीत की शादी के वक़्त गुरद्वारे में ही उज्जवल ने अपने दिल की बात पायल से कह दी।
“तुम्हारे ख्यालों ने परेशान कर रखा है। किसी भी काम में बिल्कुल भी मन नहीं लग रहा है। मन करता है बैठकर तुमसे घंटों बाते करता रहूँ।”
“क्या मतलब….?” पायल ने अनजान बनते हुए उज्जवल को टोकते हुए कहा।
“आई लव यू….” उज्जवल ने अगले ही पल जवाब दिया।

पायल कोई जवाब देती इससे पहले ही बीजी ने उसे बुला लिया और वह बिना कुछ कहे ही वहां से चली गयी। बस जाते जाते एक दफ़े पलटकर देखा था उसने लेकिन उज्जवल को कुछ समझ नहीं आया।

कुछ वक़्त लगा लेकिन उज्जवल को पायल का जवाब समझ में आ गया। एक हफ्ते के बाद अब वक़्त था जुदा होने का, शादी हो चुकी थी, सारी रस्में भी पूरी हो चुकी थी । जाना तो एक ही शहर था लेकिन एक साथ न जा पाने का अफ़सोस दोनों के चेहरों पर था। अपने शहर दिल्ली में मिलने का वादा कर दोनों अपने रस्ते को चल दिए। दोनों ही बड़ी ही बेशब्री से उस पल का इन्तजार था जब वह दुबारा मिल सके। दो दिन के बाद दोनों ही लालकिला के पास एक रेस्त्रों में मिले और बैठकर ढेरों बातें की।

धीरे-धीरे दोनों की मुलाकातें रफ़्तार पकड़कर जिंदगी के सफ़र को सुहाना बना रही थी। वक़्त गुजरता गया और मुलाकातें बढती गयी। दोनों ही एक दूसरे को दिल-ओ-जान से चाहने लगे थे। लेकिन कहते हैं न कि तूफान के आने से पहले सन्नाटा पसर जाता है, शायद ऐसा ही कुछ होने वाला था.. उज्जवल और पायल के साथ..

कुछ दिनों बाद ही पायल का पुराना दोस्त विकास वापस आ गया था। जो उसी के साथ उसके कॉलेज में पढता था। विकास को जरा भी वक़्त नहीं लगा दोनों से घुलने मिलने में लेकिन गुजरते वक़्त के साथ जैसे जैसे उन तीनों का मिलना बढता गया, उज्जवल और पायल के बीच दूरियां बढती गयी। प्यार का मौसम लगभग बीत ही गया और लड़ाई झगडे का पतझड़ आ गया था। जल्द ही उनकी मुलाकातें झगडे में बदल गयी और देखते ही देखते दी=उरियां इतनी बढ़ गयी कि उन्होंने मिलना भी छोड़ दिया। अनजाने में ही सही लेकिन विकास उनके बीच आ गया था और सबकुछ जानने के बावजूद भी उसे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था।

झगडे इतने बढ़ते गए कि उन्होंने बात करना भी बंद कर दिया। एक दिन तो पायल ने यहाँ तक कह दिया कि “मैं तुम्हें प्यार नहीं करती हूँ। तुम मेरे लिए एक टाइमपास मात्र थे। मैं विकास से प्यार करती हूँ। मैं अब तुमसे कोई रिश्ता नहीं रखना चाहती, चले जाओ मेरी जिन्दगी से..” इतना कहकर वह उज्जवल के सामने ही विकास की बाँहों में बाहें डालकर वहाँ से चली गयी।

उज्जवल उन्हें जाता देखता रहा, उसकी आँखों में पायल के लिए प्यार और उनके बिछड़ जाने का गम साफ़ नज़र आ रहा था। उसने कई कोशिशें की लेकिन पायल नहीं रुकी। वह बिना कोई परवाह किये वहाँ से चली गयी।

न पायल सुनने को तैयार थी और न ही विकास समझने को….. अपने दिल की चाहतों के हांथों मजबूर होकर उज्जवल ने एक ऐसा कदम उठाया, जिसके बारे में शायद उसने भी कभी नहीं सोचा था। कई कोशिशों के बाद भी जब कोई उज्जवल की बात सुनने को तैयार नहीं हुआ तो उसने विकास को डराने का फैसला किया, उसने सोचा कि शायद डराने से विकास उन दोनों के बीच से हट जायेगा।

जिसके चलते उसने दिल्ली के किसी ठेकेदार से एक रायफल का जुगाड़ किया और विकास को फ़ोन कर पुराना किला के पास मिलने को बुलाया। पहले तो विकास ने मना किया लेकिन उज्जवल ने जिद कर उसे बुला ही लिया। उसे बुलाने के बाद उज्जवल तय वक़्त से पहले ही पूरी तैयारी के साथ पुराना किला के पास बताई जगह पर पहुँच गया।

विकास ने उज्जवल से मिलने की बात पायल को भी बताई और फिर विकास और पायल दोनों ही उज्जवल की बताई जगह पर पहुँच गए। विकास से साथ पायल भी है, इस बात से उज्जवल अनजान था। विकास ने बुलाई जगह से थोड़ी दूर हटकर गाड़ी पार्क की जिससे उज्जवल को पायल का पता न चके और वह गाड़ी से उतरकर उज्जवल के पास चला गया।

“देख विकास ऐसा है, बहुत दिन हुए तुझे मेरे और पायल के बीच में आये। चुपचाप वापस लौट जा जहाँ से आया है, वरना अच्छा नहीं होगा।” उज्जवल ने हल्का सा अकड़ते हुए कहा।

विकास भी कहाँ पीछे रहने वाला था, उसने भी आव देखा था ताव और झटकते हुए जवाब दिया। जल्द ही दोनों की बातचीत झगडे में बदल गयी। झगडा बढ़ते देख उज्जवल ने विकास को डराने के लिए रायफल निकाल एक हवाई फायर किया।गोली की आवाज सुनकर पायल गाड़ी से उतरकर उनके नज़दीक आ गयी। उसने दोनों को अलग करने की कई कोशिशें की लेकिन दोनों अलग नहीं हुए।

दोनों की छीना झपटी में रायफल एक बार फिर फायर हो गयी, जिससे वह हो गया जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। गोली सीधे जाकर पायल को लग गयी। पायल के गिरते ही उज्जवल ने उसे अपनी गोद में लिटा लिया। पायल की सांसें एक अदम से तेज और धड़कन की रफ़्तार कम होने लगी। देखते ही देखते पायल इस दुनिया से आजाद हो गयी। उसकी आँखें अभी भी खुली हुई थी, उज्जवल उसे नाम आंखों से अभी भी देखे जा रहा था। पायल को इस हालत में देख उज्जवल पत्थर हो गया था। वाकई खुद की ही चाहत उज्जवल की चाहत की दुश्मन बन गयी।

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