Bullet | Mid Night Diary | Mastana

बुलेट | मस्ताना

सड़को पे सोता इंसान
घर मे बैठा बेरोज़गार
कूड़े मे मुँह मारता कंकाल,
और गरीबो के विकास मे
अब बुलेट दौड़ेगा,
मेरे हिन्दुस्तान मे।

नॉर्मल ट्रेन समय पर नही
ना अपनी स्पीड मे
यहाँ वहाँ रुक जाती
कई बार दुर्घटना घट जाती,
ट्रेने भी रद हो जाती
फिर भी बुलेट दौड़ेगा
मेरे उसी हिन्दुस्तान मे।

गरीबी दूर कैसे होगा
जब अमीरो की शान मे
करोड़ो का बुलेट दौड़ेगा,
नगे पैर गरीब सड़को पर ही चलेगा
गरीबो आज तुम्हें सचाई बताता हूँ
गरीबो का कोई नही।

राजनीति गरीबो के नाम
झूठा विकास गरीबो के नाम
योजनाऍ गरीबो के नाम
फिर भी नही हुआ गरीबो का विकास,
कितने निर्ल्लज हिन्द के वासि हो
बुलेट भी आया तुम्हारे विकास मे
फिर भी गरीबी गरीबी रोते हो।

 

-कवि मस्ताना 

 

Kavi Mastana
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