बे-नाम रिश्ता | अमन सिंह | #बेनामख़त

अब बस वो पल याद आता है जब तुम मुझे छोड़कर चली गयी थी। दुनियां की नज़रों में दिखने वाले रिश्तों में से कोई भी रिश्ता हमारा नहीं था फिर भी पता नहीं क्यों उस पूरी रात जैसे आँखों की बारिश थमने न नाम ही नहीं ले रही थी। पूरे दो हफ्ते बाद काफी मिन्नतें करने के नतीजा यह था कि तुम मिलने तो आई लेकिन फिर से जाने के लिए, हमेशा के लिए…

हम मिले, नज़रें भीं मिली… क़दमों की बढती रफ़्तार भी मेल खा रही थी, लेकिन तुम आयीं और आगे बढ़ गयीं। मैंने चाहा तो नहीं लेकिन यह कदम बढ़ते रहे, साथ बढ़ते रहे हमारे दरमियाँ के फासले.. हम साथ ही चले थे, एक ही चाल, एक ही डगर बस फर्क सिर्फ इतना था हमारी मंजिलें अलग हो चुकी थी। अब बस वो पल याद आता है जब तुम मुझे छोड़कर जा रही थी।बस एक और बेनाम सा ख़त तुम्हारे नाम उन अधूरी बातों के साथ जिन्हें मैं किसी से कह नहीं पता।

1006total visits,1visits today

3 thoughts on “बे-नाम रिश्ता | अमन सिंह | #बेनामख़त

  1. मैं भी कहाँ,,जाना चाहती थी,पर क्या करूँ,तुम्हारे हिस्से मैं मोहब्बत और मेरे हिस्से मि मजबूरियां आयी।।।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!
%d bloggers like this: