बारिश | अमन सिंह | #बेनामख़त

आज जैसे सिर्फ बारिश लौटकर नहीं आई, बीती जिंदगी के कुछ पुराने धुंधले से किस्से लौट आये जिंदगी में.. नहीं जानता कि तुम इस बारिश से मिल पायी या नहीं लेकिन कमरे के पास के झरोके से बारिश के छीटे जब मेज पर रखी डायरी पर पड़े तो मानो ऐसा लगा जैसे तुम्हारे बालों से आती भीनी खुशबू मेरी सांसों को छू गयी।

हवा के झोके से जब कुछ बूँदें मेरी पलकों पे आ गिरी तो बस पलकें खुद को रोक न पाई और बरश गयी। मेरे भीतर मेरे बाहर दोनों ओर सिर्फ बूंदें थी फर्क सिर्फ इतना था कि आसमान से गिरती बूंदों से तुम याद आई और तुम्हारी याद से पलकों में बूंदें… बस फर्क सिर्फ इतना सा ही था। वाकई आज सिर्फ बारिश नहीं लौटी, उसके साथ लौट आये कुछ पुराने किस्से मेरे और तुम्हारे.. बस एक और बेनाम सा ख़त तुम्हारे नाम उन अधूरी बातों के साथ जिन्हें मैं किसी से कह नहीं पता।

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