Barf Se Lamhein | Mid Night Diary | Musafir Tanzeem

बर्फ से लम्हें | मुसाफिर तंज़ीम

बर्फ़ जैसे जमे हुए लम्हें
मुलाकातों की गर्मी से पिघलते हैं

और रूहानी सी भाप उड़ती है
जो हवा में अपनी ठंडक से

खूबसूरत सा एहसास भर देती है
फिर अगली मुलाकात तक

दोनों न जम पाते हैं
न पिघल पाते हैं

एक राह ताकता है
दूसरा वक़्त ताकता है

इश्क़ की नादानियों का
ये भी एक मुकाम होता है

खाली सी जेबों में
खुशियों का पूरा इंतजाम होता है

-मुसाफिर तंज़ीम 

 

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