बचपन | दिव्यांशू कश्यप ‘तेजस’ | #उन्मुक्तइंडिया | #बचपनबोलताहै

हॅसी हताश, खिलौने उदास, किलकारी गुमनाम है।
शायद आज के दौर में  बचपन इसी का नाम है।
न जाने क्यूॅ महरूम है वो अपनों की मोहब्बत से।
शायद आज के दौर में मॉ-बाप को बहुत काम है।
वृक्ष बचपने का, बढ़ता है अपनों की रहनुमाई में।
घर की आया तो जमाने में बस यूॅ ही बदनाम है।
ये दूरियॉ बच्चों से, बुढापे में असर करेंगी जरूर।
जान के समझ लो वरना ये नसीहतें भी आम हैं।
अस्त-व्यस्त हैं सभी, इस व्यस्तता के नये दौर में।
क्या ‘तेजस’  को कुछ भी सुन रही ये अवाम है।
-दिव्यांशु कश्यप ‘तेजस’
Divyanshu Kashyap TEJAS
Divyanshu Kashyap TEJAS

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