अन्यथा व्यर्थ तेरा जीना है | अनुपमा वर्मा

स्वार्थ सिद्धि कर रहा
धरा पर व्यर्थ बोझ तू
स्वयं से आगे बढकर देख
आएगा स्वयं के फिर करीब तू
जब तलक प्राण शेष है
कर दूसरो पर निसार तू
अन्यथा व्यर्थ तेरा जीना है
जो ना किसी के काम आया तू

मन मे द्वेष भरा हुआ
कर्म कर निर्मल हो तू
विचलित तेरा ह्रदय क्यूँ है
अपनी इच्छाओ को समेट तू
जब तलक जुबां सलामत है
सबसे मीठी वाणी बोल तू
अन्यथा व्यर्थ तेरा जीना है
जो ना किसी के काम आया तू

अनेको इम्तिहान होगे
नेकी की राह ही चलना तू
हर एक असहाय की
दुआ लेकर ही आगे बढना तू
जब तलक हाथ सलामत है
किसी को ना गिरने देना तू
अन्यथा व्यर्थ तेरा जीना है
जो ना किसी के काम आया तू

 

-अनुपमा वर्मा 

 

Anupama verma
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