Adrashya Ghar | Mid Night Diary | Anupama Verma | #UnlockTheEmotion

अदृश्य घर | अनुपमा वर्मा | #अनलॉकदइमोशन

जो होता नही हकीकत मे
वो भी नजर आ जाता है
तुम्हे देखते ही खुद-ब-खुद
एक अदृश्य घर बन जाता है

ना सीमेंट ना ईटे ना और कोई सामान लगता है
लेकिन फिर भी घर बनता है
या कुछ है जो आँखो को ठगता है
क्योकि मैने कभी नही सुना
कि घर चंद पलो मे बनता है

घर इतना खुबसूरत कि बस
दिल वहा रूकना पसंद करता है
कई दफा तो उन मजदूरो को…

रूको..
हम तो मजदूर नही है
गर हम नही तो कौन है?
हाँ! हम ही तो है।

क्योकि हमारे सिवा यहां कोई और नही है
पर ये कैसी कारीगरी कर डाली हमने
जिसे छू जाना भी महज भ्रम है
किंतु भ्रम भी भा रहा है

जैसे मजदूरो को मेहनताना मिल रहा है
लेकिन यह क्या?
हमारा घर तो रो रहा है
क्यूँ इसे अदृश्य कहा जा रहा है

क्या सुंदर चीजो का
यही अंत होता है
नही! यह अंत नही होगा।

सुनो!
गर तुम यही रूक जाओ!
या हम साथ हो जाए!
तो शायद इस शापित घर को
अदृश्य होने से मुक्ति मिल जाए।

-अनुपमा वर्मा

 

Anupama verma
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3 thoughts on “अदृश्य घर | अनुपमा वर्मा | #अनलॉकदइमोशन

  1. Amazing ..in lines m jo mean chupa h shayd.m pura nhi samjh paya bt apni life ko bht had tak jod paya isme ..this is just awesome ..great use of words

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