Abhi To Raat Baki Hai | Mid Night Diary | Vikram Mishra

Abhi To Raat Baki Hai | Vikram Mishra

हो गए मायूस ये बादल तो क्या गम है?
अभी बरसात करने को कई हालात बाकी है।
न पूंछो इस घडी तुम हाल हमसे ऐ मेरे साथी,
अभी तो बात करने को ये सारी रात बाकी है।।

अभी तो भोर ने दस्तक दिया है, दिन नही गुजरा।
अभी दीपक बुझाने को कई घरात बाकी है।।
अभी तो नींद टूटी है, स्वप्न अब भी अधूरा है,
अभी तो लूटने को गली की खैरात बाकी है।।

जश्न जारी रहेगा, दिल्लगी भी साथ में होगी।
अभी तो झूमने को पड़ोसी की बारात बाकी है,
सुना है कुछ अदब से झोपड़े में पेश आये थे।
अभी अंगड़ाइयां लेने को कुछ जज्बात बाकी है।।

फख़त तुम सर हिलाकर आज मेरी जीत तय कर दो।
अभी क्या है ,अभी तो महफिल-ए-सौगात बाकी है।।
क्या रह नहीं सकते बिना खाये मेरी ख़ातिर??
अभी चूल्हा जलाने को तो सारी रात बाकी है।।

 

 

-विक्रम मिश्रा

 

Vikram Mishra
Vikram Mishra
Share on FacebookTweet about this on TwitterShare on Google+Share on TumblrShare on LinkedInPin on PinterestEmail this to someone

212total visits,1visits today

Leave a Reply