Aaj Mujhse Kuch Likha Na Gaya | Mid Night Diary | Aditi Chatterjee

आज मुझसे कुछ लिखा नहीं गया | अदिति चटर्जी

हज़ारो ख्याल ऐसे टकराए
कुछ भी संभाला ना गया,

सहफ़ा-सिय़ाही सब थी
विसाल-ए-हर्फ़ न हो पाया,

होश-ओ-दानिश बाँधे भी
दश्त-ए-दिल में खोता गया।
आज मुझसे कुछ लिखा ना गया।

ए’तिमाद था अल्फ़ाज़ों पे
एक एक कर आज़माता गया,

शुआ-ए-फ़िराक या तजदीद-ए-व़फा
कुछ भी बयान न हो पाया,

मौज-ए-ख्याल कि ऐसी रवानी
सर-ब-सर बहता गया।
आज मुझसे कुछ लिखा ना गया।

नयाह कि आरज़ू लिए
खर-ओ-खास बुनता गया,

पैहम हिसाब-ए-तमन्ना से
गिरानी-ए-दिल सह न पाया,

साग़र लबों से लगा के
अख़र मशगूल खुद में हो गया।
आज मुझसे कुछ लिखा ना गया।

 

 

-अदिति चटर्जी

 

Aditi Chatterjee
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