आज फिर से जीने को दिल करता है | नयनसी श्रीवास्तव

सब कुछ तो है पास मेरे…
न जाने क्या ढूंढ रही हूं
न जाने आखिर किस चीज की कमी है
कल तक जो आसमां था मेरे लिए…

आज मेरी वह जमीन है
ढूंढती फिरती हूं यहां वहां…
कुछ अनजाने सवाल वक्त की कब्र में दब है
आज बस खामोशी अच्छी लगती है और दोस्त आंखों की नमी…

आंखें बंद करके महसूस कर रही थी कुछ इस तरह कि एहसास होता था उड़ रही थी मैं
एहसास बिल्कुल सच्चा था पर इतना की अंधी खाई में गिर रही थी मैं
अब घर के बिखरने का डर नहीं आज हवा में तैर रही हूं
और इस खाई की दरार को चीर के ऊपर आने की कोशिश कर रही हूं मैं

अब बंदिशों की परवाह नहीं आसमान की तरह खुल जाने को जी करता है
आंसू तो आंखों में हमेशा रहेंगे
बारिश में भूल जाने को जी करता है
सब यादों को मिटाना है

सब कुछ भूल जाने को जी करता है
आज इस जमीन से मिलने को जी करता है
हवा में घुल जाने को जी करता है
आज फिर से जीने को दिल करता है

 

– नयनसी श्रीवास्तव

 

Nayansi Shrivastava
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