Aabaru | Mid Night Diary | Vinay Kumar

आबरू | विनय कुमार

पार्टी का माहौल था। केशव ने अपनी जन्मदिन की ख़ुशी में सभी दोस्तों को बुलाया था। ज़मीन पर बीछे दो गद्दे, उनपर बैठे 7 पियकड दोस्त उनमे से दो के हाथ में फ़िल्टर तक जल चुकी cigarette, गद्दे साथ रखी ख़ाली पड़ी दस beer और दो whiskey की bottle, ज़मीन पर बिखेरे पड़े चिप्स और नमकीन, वो देर से मँगाया हुआ खाना जो किसी ने खाया था और किसी ने बस दूर से ही सूंघ लिया था। यह सब संकेत कर रहा था की पार्टी अब ख़त्म होने ही वाली है। गानो की धुन भी अब ‘दारू बदनाम’ से हट कर ‘रंजीशें ही सही दिल दुखाने के लिये आ’ जैसी ग़ज़ल पे आ पहुँची थी। कुछ लोग औंधे पड़े रोने का इंतज़ार कर रहे थे और मेरे दिमाग़ में जल्दी थी की 10:30 बज चुके है घर भी जाना है।

मैंने केशव से कहा- यार देर हो रही है, मम्मी इंतज़ार कर रही होगी, फ़ोन आने से पहले निकल जाऊँ तो बेहतर है, ज़्यादा रात हो जाएगी तो वो परेशान होंगी।

केशव- ठीक 11:00 बजे निकलते है।k

इतना सुनते ही सामने वाले गद्दे पर बैठे,

सिद्धार्थ ने कहा- क्या यार अभी से! अभी टाइम ही क्या हुआ है रूक जाओ सब सुबह निकलते है।

तो मैंने जवाब दिया- नही मुझे जाना है..

सिद्धार्थ भी मेरे साथ ही ऑफ़िस में काम करता है। जिसे मैं बिलकुल भी पसंद नही करती, वो हमेशा ही मुझ पर अपना हक़ ज़माने की कोशिश में रहता है जो मुझे बहूत परेशान करता है। जब हम सब मिलते है तो usually hug करते है। लेकिन जब वो छूता है तो पता चलता है की उसकी intentions क्या है मेरे लिए।

वो मेरी तरफ़ बढ़ा और एक ग्लास विस्की का मेरे मुँह से लगा कर

बोला- केशव का दिन है तो कम से कम एक peg और पीके तो जाना ही पड़ेगा।

मैंने केशव की तरफ़ देखा क्योंकि मैं जितना पीना चाहती थी पी चुकी थी ये केशव भी जानता था।

केशव ने उसे रोकते हुए कहा- भाई रहने दे उसे घर जाना है तू और मैं यँही है हम पीते है, ला मुझे दे।

सिद्धार्थ- नही भाई कम से कम आज ऐसा ना बोल एक पेग तो पीना ही पड़ेगा इसको।

इस पर केशव ने इशारों में मुझसे कहा की पीले वरना ये ड्रामे करेगा क्योंकि पी कर हाई हो चुका है

मैंने केशव की तरफ़ ग़ुस्सा दिखाते हुए एक साँस में पूरा गिलास पी गयी।

कुछ देर और बात हुई और फिर ग़ज़ल की मदहोशी में सब चुपचाप लेट गए।

मैं खड़ी हो कर washroom की तरफ़ बढ़ी जो दूसरे कमरे से लगा हुआ था।

Washroom से बाहर निकली तो सिद्धार्थ भी बाहर ही खड़ा मिला उसने मुझसे कहा- ऐसा क्या है केशव में जो मुझमें नही?

क्योंकि वैसे भी वो समझने की हालत में नही था मैंने समझाने के लिए उसको बोला- केशव मेरा अच्छा दोस्त है बस, जैसे के तुम भी।

उसने इतना सुना ही की उसने मुझे गले लगा लिया और बोला- मुझमें और केशव में कोई फ़र्क़ नही?

और धीरे धीरे मेरी कमर को पकड़ते हुए मेरे गले को चूमने लगा।

मैं उतना तेज़ी से react नही कर सकती थी जितना शायद होश में कर पाती..

उसने मुझे दीवार से लगा, मेरे होंठों को चूमने लगा जैसे ही उसने मेरे गाल से होंठों पर आने की कोशिश की मैंने उसे पीछे धकेल दिया और दूसरे कमरे में जा पहुँची।यहाँ लग भग सब सो ही गये थे, मैंने केशव को उठाया और बोला- प्लीज़ केशव अब काफ़ी टाइम हो गया है मुझे छोड़ आओ!

केशव ने पूछा- क्या time हुआ है?

मैंने जवाब दिया- 11:00 बजे है अब जल्दी चलो।

केशव ने अपनी bike की चाबी उठायी और मैं सबको bye बोल कर बाहर निकल आयी।

इस incident के बारे में कई बातें मेरे दिमाग़ में घूम रही थी। क्यों उसने ऐसा किया? अब मैं कभी उसकी मजूदगी में शराब नही पीने वाली, ना कभी अब उससे बात करने वाली, केशव को ये सब बताऊँ या ना बताऊँ। अभी नही आज जन्मदिन है उसका फिर कभी।

केशव और मैं अच्छे दोस्त है उसने कभी मुझसे इस तरह की बात तक नही की और सिद्धार्थ को ऐसा लगता है कि हमारे बीच में शायद कोई रिलेशन है और अगर होता भी तो उसे इस सब से क्या लेना देना।

हम bike के पास पहुँचे उसने मुझसे पूछा- अगर उतरी नही है तो थोड़ा रूक कर चली जाना?

मैंने कहा-अब ठीक हुँ मैं, बस एक cigarette दे दो मुझे।

उसने cigarette का packet और माचिस मुझे दे दी।

मैंने एक cigarette जलायी और bike के पीछे बैठ गयी।

बार बार उस ख़याल ने मुझे घेर रखा था की ऐसा क्या है जो वो मुझे समझ नही पाता ल? क्या मैं अकेली ही ऐसी हुँ या सबके साथ ही उसका व्यवहार ऐसा है(मैंने कभी किसी से कुछ बोला या पूछा भी नही)? हम साथ में काम करते है इन सब बातों का होना परेशानी ही खड़ी करेगा हमारे बीच में, तो इग्नोर करना ही बेहतर है लेकिन उसे भी यह समझना चाहिए।

इसी बीच bike चलाते हुए केशव ने मुझसे पूछा- मेरा गिफ़्ट?

मैंने ज़रा नरम आवाज़ में जवाब दिया-क्या चाहिए तुझे?

इस पर वो हंस कर बोला- मज़ाक़ कर रहा हुँ, तू aunty को माना कर इतनी देर तक रूक पायी वो ही बहूत है।

मेरे दिमाग़ में जाने की जल्दी ने फिर से बुखार पकड़ लिया, मैंने उस बात को वही रोक केशव से कहा- केशव सुन, तू मुझे किसी ऑटो में बैठा दे, मेट्रो की फ़्रीक्वन्सी कम हो जाती है इस वक़्त पता नही कितना देर से आएगी, ऑटो से रास्ता छोटा भी पड़ेगा।

केशव- ओके, आगे चौराहे से ऑटो मिल जाएगा लेकिन अगर चाहे तो cab भी ले सकती है!

मैंने जल्दी में कहा- हाँ ट्राई करो अगर जल्दी आ जाए तो वरना पहले चौराहे पर चल के देख लो ऑटो खड़े है या नही।

हम चौराहे पर पहुँचे, बहूत से ऑटो वाले थे केशव अपने फ़ोन में cab बुक करने में लग गया। एक कब बुक हुई उसमें समय बता रहा था 16 मिनट दूसरे app पर देखा तो 19मिनट।

तो मैंने केशव से कहा- ऑटो से ही चली जाती हुँ जाते जाते ही 11:30 हो जाएँगे।

केशव- हाँ ठीक है।

मैंने एक और cigarette पैकेट से निकाल कर जला ली और पैकेट और माचिस केशव को वापस कर दिया।

केशव ने ऑटो वाले से बात की और वो चलने को तैयार हो गया।

मैंने केशव को कहा- ओके चलती चलती हुँ। nd again happy birthday my boy..chlo give me a hug..

हम गले मिले और मैं ऑटो में बैठ गयी।

Mummy को ख़ुद से call कर दिया की आधे घंटे तक आ जाऊँगी। खाना खा लिया है तो बहन को बोल देना की gate खोल दे।

मैं अपनी cigarette के साथ आज की बातों में खोयी थी फिर से वो ही ख़याल सामने आ रहे थे। इसी बीच में मेरा ध्यान ऑटो वाले के rare view mirror पर गया। वो मुझे mirror से घूरे जा रहा था। श्याद इसी लिए के मैंने शराब पी थी और cigarette तो जल ही रही थी। लेकिन नही!

वो मुझे कुछ और ही समझ रहा था

उसने फिर बड़बड़ना शुरू किया की पाता नही कैसी लड़कियाँ है कुछ पैसों के लिए धंधा करने लगती है क्या होगा इस देश का। शराब, cigarette के नशे ने इनकी बुद्धि ख़राब कर दी है।

पहले वो ये सब धीरे धीरे बोल रहा था,मुझे इतना कुछ सुनायी नही दिया मैंने इग्नोर किया फिर वो ज़ोर ज़ोर से rare view mirror में देख कर बोलने लगा।

इस पर मुझे ग़ुस्सा आया और मैंने उसको बोला- आप क्या बड़ बड़ किए जा रहे हो? तमीज़ नही है आपको? आप को क्या मतलब मैं क्या खाती हुँ क्या पीती हुँ क्या पहनती हुँ, कहा जाती हुँ। आप अपना काम करो।

ऑटो वाला- अपना काम ही कर रहा हुँ, काम तो तुम जैसे लोगों को नही है, दो पैसे के लिए इज़्ज़त बेच देते है।

मैंने ग़ुस्से में बोला: आप ऑटो रोक दो, मुझे नही जाना आपके साथ।

तभी बराबर से कुछ लड़के अपनी bike से हमें लड़ते हुए नोटिस कर रहे थे

तो उन्होंने पूछा- आप ठीक हो??

मैंने दिमाग़ में सोचा, पूरा रास्ता ख़ाली पड़ा है, 4 लड़के है यह अकेला ऑटो वाला शयाद इन लड़कों को ट्रस्ट नही कर सकती.. ऑटो में तो केशव ने ख़ुद ही बैठाया है तो उसे पता है इनका क्या भरोसा..

मैंने बोला- सब ठीक है भैया।

उनके जाते ही मैंने ऑटो को रुकवाया और उसे 100 रुपए का नोट देकर वहाँ से भागने लगी..

ख़ुद भी नही पता यह कौनसी जगह है। बस ख़ाली सड़क है कुछ कुत्ते बंद पड़ी दुकानों के बाहर अपना खाना ढूँढ रहे है.. पूरी सड़क स्ट्रीट लाइट की रोशिनी से घिरी पड़ी है लेकिन मेरी दिमाग़ की रोशिनी ग़ायब है..

ऑटो पर यक़ीं नही कर सकती जो की आस पास से गुज़र रहे है..

किसी अनजान से भी बात नही कर सकती..

क्योंकि जब एक ऑटो वाला ये हरकत कर सकता है तो पता नही सामने वाले के दिमाग़ में क्या है।

वक़्त भी 11:30 हो गया है।

मैं main road पर ही चलती रही, तभी एक police वाला अपनी bike पर दिखायी पड़ा..

मैंने उसकी तरफ़ हाथ करके पूछा sir यहाँ आस पास metro station कहाँ है..

उसने मुझे ऊपर से नीचे तक देखा शायाद ये भी पहले judge कर रहा था..

बोला- आओ bike पर बैठो मैं छोड़ देता हुँ।

लेकिन जो इस रात मेरे साथ हो रहा था मेरी हिम्मत नही हुई के अपने क़दम बढ़ाकर उसके पीछे बैठ जाऊँ।

मैंने कहाँ- नही sir मैं चली जाऊँगी आप बस रास्ता बता दीजिए..

उसने कई बार बोला लेकिन मेरी हिम्मत नही हुई की भरोसा कर पाऊँ..

आख़िर में उसने मुझे रास्ता बताया और मैं बिना कुछ सोचे तेज़ तेज़ उस तरफ बढ़ने लगी..

जैसा उसने मुझे बताया था मेट्रो 1K.M दूर था लेकिन मैं 15मिनट से चले जा रही थी लेकिन metro station नही आया। मेरे आँसू आँख से छलक गए..

मैंने तब ही केशव को फ़ोन किया और ज़ोर ज़ोर से रोने लगी- तू प्लीज़ मुझे यहाँ से आकर ले जा, मुझे घर जाना है..

मुझे बहूत डर लग रहा है तू बस मुझे यहाँसे लेके जा प्लीज़..

केशव ने हड़बड़ाहट में मुझसे पूछा- क्या हुआ? तू है कहा?

मैंने रोते हुए बोला- तू बस जल्दी आजा प्लीज़।

केशव- आ रहा हुँ तू बस वही रहियों और अपनी लोकेशन मुझे भेज..

मैंने रोते हुए कहा- भेजती हुँ जल्दी आ प्लीज़..

मैं सड़क पर चारों और नज़र घुमाने लगी, मुझे नही पता था जिस शहर में मैं पैदा हुई, पली बड़ी, ऐसा सलूक इस शहर ने आज तक नही किया था तो फिर आज क्यों ऐसा हो रहा था क्यों ये शहर मुझे आज खाने को दौड़ पड़ा था..

मेरी ग़लती क्या थी कि मैंने शराब पीकर सिद्धार्थ को उकसाया था। नही?

क्या उस ऑटो के सामने मेरा केशव को hug करना और cigarette पीना?

या उस सुनसान सड़क पर उस police वाले से मदद माँगना?

तभी मुझे सामने से P.C.R van आती दिखायी दी। मैं रोते रोते उनके पास गयी और सारी बात उनको बतायी की मेरे साथ ये सब हुआ है..

उन Uncle ने मेरी बात बहूत ध्यान से सुनी और बीच बीच में हर बात पर बहूत प्यार से अपना input देते गए….हाँ हाँ बहूत ग़लत हुआ ऐसे थोड़ी करना चाहिए लोगों में कुछ इंसानियत बची ही नही है..

मैंने सोचा था की ये on duty है, शायाद पहले वाला police वाला duty से घर जा रहा होगा तभी उसने मुझे रास्ता ग़लत बताया और बहलाने की कोशिश की लेकिन सारी बातें सुन ने के बाद मुझे रोते बिलखते देखने के बावजूद उसने भी वही किया..

पहले उसने मेरे लिए पानी मँगाया और..

बोला की- चुप हो जाओ, घर कहाँ है तुम्हारा

मैंने पानी पीते पीते उसको बताया और फिर मैं शांत खड़ी केशव का इंतज़ार कर ही रही थी उसने अपने साथी को कुछ लाने के लिए भेज दिया।

और मेरे पास आकर बोला- लाओ अपना नम्बर मुझे दे दो। मुझे ये अटपटा महसूस हुआ, ये समझ नही आया उसने किस हक़ से उस condition में मुझसे यह पूछा अगर वो मुझसे यह कहता की उस police वाले के अगेन्स्ट ऐक्शन लेते है या बेटा उस ऑटो का नम्बर याद है मैं कंट्रोल रूम में फ़ोन करके ख़बर निकालता हुँ या कुछ भी जो मेरी उस समय पर हेल्प कर पता। उसकी नियत उसकी आँखे साफ़ बयान कर रही थी..

मैंने बात को टालते हुए उससे कहा- कोई नही अंकल मेरा दोस्त आ रहा है मैं चली जाऊँगी..

फिर उसने मुझसे कहाँ कि- कोई नही आओ फिर गाड़ी में बैठते है चली जाना..

इस बार मेरे आँसू आँखो से नही। मेरे पूरे शरीर से बहने लगे। मैं बस दुआ करने लगी की किसी तरह ये लम्हा बीत जाए या किसी तरह केशव यहाँ आ जाए..

मैं गाड़ी से उलटी तरफ़ चलने लगी।

तभी एक तेज़ लाइट मेरी आँखो पड़ी..

Bike रूकी तो वो केशव था मैं भाग कर उसके पास गयी। मेरे आँसुओ का बाँध ख़ुद को रोक ना पाया और मैं ख़ूब फूट फूट कर रोने लगी..

- विनय कुमार
Vinay Kumar

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