Month: July 2018

Poetry

आज फिर से जीने को दिल करता है | नयनसी श्रीवास्तव

सब कुछ तो है पास मेरे… न जाने क्या ढूंढ रही हूं न जाने आखिर किस चीज की कमी है कल तक जो आसमां था मेरे लिए… आज मेरी वह जमीन है ढूंढती फिरती हूंContinue reading

Diwali Mnana Chahta Hun | Mid Night Diary | Vinay Kumar
Poetry

दिवाली मानना चाहता हूँ | विनय कुमार

क्यों तुम मुझे मैं जैसा हूँवैसा नहीं अपनातेक्यों तुम मुझेदूसरे लोगोँ सेतोलते होक्यों तुम मुझेवो बनाना चाहते हो जो मैं हु ही नहींमैं सावन की घटा नहीं तो क्या हुआमैं उस जंगल का छोटा साContinue reading

Itna Mushkil Bhi Nahi Hai | Mid Night Diary | Anupama Verma
Poetry

इतना मुश्किल भी नहीं है | अनुपमा वर्मा

बहोत आसान है जो हम अकसर करते है लेकिन मैने करके देखा है हाँ.. वो जो हम अकसर नही करते है और यकीं करो दोस्तो इतना मुश्किल भी नहीं है हाँ.. बहोत आसान है बाहरContinue reading

Wo Darti Hai | Mid Night Diary | Uttam Kumar
Poetry

वो डरती है | उत्तम कुमार

वो डरती है। साथ किसी के रहने से,साथ किसी के चलने से, साथ किसी के होने से,साथ किसी के जीने से, वो डरती है। बात किसी से करने से,बात किसी का सुनने से, बात किसीContinue reading

Aabaru | Mid Night Diary | Vinay Kumar
Short Stories

आबरू | विनय कुमार

पार्टी का माहौल था। केशव ने अपनी जन्मदिन की ख़ुशी में सभी दोस्तों को बुलाया था। ज़मीन पर बीछे दो गद्दे, उनपर बैठे 7 पियकड दोस्त उनमे से दो के हाथ में फ़िल्टर तक जलContinue reading