Day: April 28, 2018

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वासना नही प्रेम है ये | “उपासना पाण्डेय”आकांक्षा

अगर मैं तुमसे अपने दिल का हर हाल कहूं, तो वो प्रेम है मेरा, अगर मैं तुमसे मिलने का जिक्र करूं, तो वो मिलन जिस्म का नही रूह से रूह को मिलने की ख्वाहिश होगी,Continue reading

Poetry

घर | उत्तम कुमार

घर नहीं पिता कि मन्नत है, ये माँ कि बनाई हुई जन्नत है। यहाँ खुशियाँ बेशुमार और, आँसुओं कि किल्लत है, घर नहीं पिता कि मन्नत है। हर ओर फैली है सुख कि चादर, यहाँContinue reading

Poetry

वो इंसान नहीं हैवान था | प्रकाश कुमार

वो तड़पती रही , वो तड़पाता रहा , वो दर्द से कराहती रही , वो अपनी हवस बुझाता रहा । वो मिन्नतें करती रही अपनी रिहाई कि , वो अपनी दरिंदगी का चेहरा उसे दिखाताContinue reading