Month: April 2018

Wo Darti Hai | Mid Night Diary | Uttam Kumar
Poetry

वो डरती है | उत्तम कुमार

वो डरती है। साथ किसी के रहने से,साथ किसी के चलने से, साथ किसी के होने से,साथ किसी के जीने से, वो डरती है। बात किसी से करने से,बात किसी का सुनने से, बात किसीContinue reading

Ek Kali | Mid Night Diary | Divyanshu Kashyap TEJAS
Ghazal

एक कली | दिव्यांशू कश्यप ‘तेजस’

मेरे घर मे भी उजाले की एक कली आए। मैं चाहता हूँ की पूरे गांव में बिजली आए। कोई देखे छज्जे से अपनी झुल्फों के बीच से, मेरी मोहब्बत में भी ऐसी एक गली आए।।Continue reading

Khair Chhod Do | Mid Night Diary | Aman Singh
Benaam Khat

ख़ैर, छोड़ दो | अमन सिंह

कितना आसान है यह कह देना कि ‘छोड़ दो’ शायद यह दुनिया सा सबसे आसान शब्द होगा लेकिन इसे अंजाम तक ले जाना दुनिया का सबसे कठिन काम है। सिर्फ़ कहने भर से कहाँ कुछContinue reading