Month: April 2018

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वासना नही प्रेम है ये | “उपासना पाण्डेय”आकांक्षा

अगर मैं तुमसे अपने दिल का हर हाल कहूं, तो वो प्रेम है मेरा, अगर मैं तुमसे मिलने का जिक्र करूं, तो वो मिलन जिस्म का नही रूह से रूह को मिलने की ख्वाहिश होगी,Continue reading

Poetry

घर | उत्तम कुमार

घर नहीं पिता कि मन्नत है, ये माँ कि बनाई हुई जन्नत है। यहाँ खुशियाँ बेशुमार और, आँसुओं कि किल्लत है, घर नहीं पिता कि मन्नत है। हर ओर फैली है सुख कि चादर, यहाँContinue reading

Poetry

वो इंसान नहीं हैवान था | प्रकाश कुमार

वो तड़पती रही , वो तड़पाता रहा , वो दर्द से कराहती रही , वो अपनी हवस बुझाता रहा । वो मिन्नतें करती रही अपनी रिहाई कि , वो अपनी दरिंदगी का चेहरा उसे दिखाताContinue reading

Wo Darti Hai | Mid Night Diary | Uttam Kumar
Poetry

वो डरती है | उत्तम कुमार

वो डरती है। साथ किसी के रहने से,साथ किसी के चलने से, साथ किसी के होने से,साथ किसी के जीने से, वो डरती है। बात किसी से करने से,बात किसी का सुनने से, बात किसीContinue reading

Ek Kali | Mid Night Diary | Divyanshu Kashyap TEJAS
Ghazal

एक कली | दिव्यांशू कश्यप ‘तेजस’

मेरे घर मे भी उजाले की एक कली आए। मैं चाहता हूँ की पूरे गांव में बिजली आए। कोई देखे छज्जे से अपनी झुल्फों के बीच से, मेरी मोहब्बत में भी ऐसी एक गली आए।।Continue reading

Khair Chhod Do | Mid Night Diary | Aman Singh
Benaam Khat

ख़ैर, छोड़ दो | अमन सिंह

कितना आसान है यह कह देना कि ‘छोड़ दो’ शायद यह दुनिया सा सबसे आसान शब्द होगा लेकिन इसे अंजाम तक ले जाना दुनिया का सबसे कठिन काम है। सिर्फ़ कहने भर से कहाँ कुछContinue reading