Day: March 29, 2018

Wo Bachpan Ab Bhi Yaad Hai Mujhe | Mid Night Diary | Prajjval Nira Mishra
Poetry

वो बचपन अब भी याद है मुझे | प्रज्ज्वल नीरा मिश्रा

जब सुबह सुबह, चाय गैस पे होती थी और माँ गुसलखाने में। हर रोज़ की तरह धीमी आंच पर यूँ ही चाय खौल रही होती थी। पापा आवाज पे आवाज लगा रहे होते थे। -“अरेContinue reading

Nar Sanhaar Ab Band Karo | Mid Night Diary | Anubhav Kush
Poetry

नर संहार अब बंद करो | अनुभव कुश

गोली से, तोपों के गोलों से घर टूटे पक्के पक्के, रोटी को और छाया को तड़प रहे सारे बच्चे। सारे फसाद की जड़ वहां उपस्थित संसाधन हैं, जान गंवाते घूम रहे बच्चे भी तो सबकाContinue reading

Wo Kahte Hain Main Galat Hun | Mid Night Diary | Aditi Chatterjee
Poetry

वो कहते हैं मैं ग़लत हूँ | अदिति चटर्जी

वो कहते हैं मैं ग़लत हूँ… क्योंकि मैंने अपने इर्द- गिर्द अपना ज़ोन बनाया, जो उनके बनाये ज़ोन पर एक काँच की पतली परत बना देता है उनके रेंगते मोटे काले साँप सा रूढ़ीवादी नियमContinue reading