Day: March 27, 2018

Poetry

फिर से | उत्तम कुमार

लो आ गया तेरे शहर में फिर से, क्या होंगी कुछ मुलाकातें फिर से, मोहब्बत न हो तो न ही सही, क्या होगीं कुछ बातें फिर से? मानता हूँ कि गलतफहमी का शिकार हो गईContinue reading

Haar Kaise Maan Loon | Mid Night Diary | Musafir Tanzeem
Poetry

हार कैसे मान लूँ | मुसाफिर तंज़ीम 

अभी गिरा ही तो हूँ टूटा तो नहीं हूँ इतनी जल्दी हार कैसे मान लूँ अभी तो लड़ना शुरू किया है लड़ाई देर तक चलेगी बदन से रिसते लहू और कुछ चोटों को अपना अंजामContinue reading

Silly Baatein | Mid Night Diary | Akanki Sharma
Micro Tales

सिली बातें | एकांकी शर्मा

“भैया, आप इतनी सिली बातें कैसे कर लेते हो?” “मैंने कब कुछ सिली कहा?” “ये जो अभी………….” “”मकसद तुम्हें हँसाना होता है।” “मेरी हँसी आपको अज़ीज़ है ना?” “बहुत।” “पर मैं हँस के क्या करुँगी?Continue reading

Main Kalakaar Kehlata Hun | Mid Night Diary | Vishakha Kamra
Poetry

मैं कलाकार कहलाता हूँ | विशाखा कामरा | विश्व रंगमंच दिवस

मैदान हो या, हो मंच सही, हर गली-गली में भीङ खङी और देख मुझे हर पेङ-पात पर खुशहाली की लङी लङी उस लङी लङी से चुनकर कुछ चेहरों में साँसे भरता हूँ किरदारों में जीवनContinue reading