Month: March 2018

Agar Hum Sab Dibbe Hote | Mid Night Diary | Aishwarya Raj
Micro Tales

अगर हम सब डिब्बे होते | ऐश्वर्या

कैसा होता अगर हम सब डिब्बे होते, और हमारा जीवन कोई पोटली, और कोई होता, जो कई पोटलियाँ कंधे पर लटकाये नगर नगर घूमता! और फिर एक रोज, एक रोज वो भूलवश उस हरी पोटलीContinue reading

Wo Bachpan Ab Bhi Yaad Hai Mujhe | Mid Night Diary | Prajjval Nira Mishra
Poetry

वो बचपन अब भी याद है मुझे | प्रज्ज्वल नीरा मिश्रा

जब सुबह सुबह, चाय गैस पे होती थी और माँ गुसलखाने में। हर रोज़ की तरह धीमी आंच पर यूँ ही चाय खौल रही होती थी। पापा आवाज पे आवाज लगा रहे होते थे। -“अरेContinue reading

Nar Sanhaar Ab Band Karo | Mid Night Diary | Anubhav Kush
Poetry

नर संहार अब बंद करो | अनुभव कुश

गोली से, तोपों के गोलों से घर टूटे पक्के पक्के, रोटी को और छाया को तड़प रहे सारे बच्चे। सारे फसाद की जड़ वहां उपस्थित संसाधन हैं, जान गंवाते घूम रहे बच्चे भी तो सबकाContinue reading

Wo Kahte Hain Main Galat Hun | Mid Night Diary | Aditi Chatterjee
Poetry

वो कहते हैं मैं ग़लत हूँ | अदिति चटर्जी

वो कहते हैं मैं ग़लत हूँ… क्योंकि मैंने अपने इर्द- गिर्द अपना ज़ोन बनाया, जो उनके बनाये ज़ोन पर एक काँच की पतली परत बना देता है उनके रेंगते मोटे काले साँप सा रूढ़ीवादी नियमContinue reading

Poetry

फिर से | उत्तम कुमार

लो आ गया तेरे शहर में फिर से, क्या होंगी कुछ मुलाकातें फिर से, मोहब्बत न हो तो न ही सही, क्या होगीं कुछ बातें फिर से? मानता हूँ कि गलतफहमी का शिकार हो गईContinue reading

Haar Kaise Maan Loon | Mid Night Diary | Musafir Tanzeem
Poetry

हार कैसे मान लूँ | मुसाफिर तंज़ीम 

अभी गिरा ही तो हूँ टूटा तो नहीं हूँ इतनी जल्दी हार कैसे मान लूँ अभी तो लड़ना शुरू किया है लड़ाई देर तक चलेगी बदन से रिसते लहू और कुछ चोटों को अपना अंजामContinue reading

Silly Baatein | Mid Night Diary | Akanki Sharma
Micro Tales

सिली बातें | एकांकी शर्मा

“भैया, आप इतनी सिली बातें कैसे कर लेते हो?” “मैंने कब कुछ सिली कहा?” “ये जो अभी………….” “”मकसद तुम्हें हँसाना होता है।” “मेरी हँसी आपको अज़ीज़ है ना?” “बहुत।” “पर मैं हँस के क्या करुँगी?Continue reading

Main Kalakaar Kehlata Hun | Mid Night Diary | Vishakha Kamra
Poetry

मैं कलाकार कहलाता हूँ | विशाखा कामरा | विश्व रंगमंच दिवस

मैदान हो या, हो मंच सही, हर गली-गली में भीङ खङी और देख मुझे हर पेङ-पात पर खुशहाली की लङी लङी उस लङी लङी से चुनकर कुछ चेहरों में साँसे भरता हूँ किरदारों में जीवनContinue reading

Poetry

आज भी वो तुझे प्यार नहीं करता | अनुप्रिया अग्रहरि 

आज शाम जब मैं कॉलेज से आ रही थी। फिर उसका मुस्कुराता चेहरा देखा।। उसके दिल की धड़कनों को सुना। तो लगा शायद आज भी ये मेरे लिए ही धड़कती है।। फिर उस मुस्कान मेContinue reading

Short Stories

भागी हुई लड़कियाँ | भावना त्रिपाठी

कैसा नकारात्मक शब्द है न भागना! जैसे कायरता को परिभाषित कर रहा हो। पीठ दिखा कर भाग जाना कोई बहादुरी का काम है भला? कितनी भी मुसीबत हो, मुश्किल हालातों का डटकर सामना करना चाहिए,Continue reading