Day: January 17, 2018

Uljhane | Mid Night Diary | Krishan Kumar Pandey
Poetry

उलझने | कृष्ण कुमार पांडेय

जिंदगी की उलझनों से कुछ वक़्त मिला तो सोचा जिंदगी की उलझनों में क्या खोया क्या पाया है कोशिश की मुस्कुराने की हर ख़ुशी हर गम में कभी रुलाया है खुशियों ने तो कभी ग़मोंContinue reading

Coffee | Mid Night Diary | Amita Gautam
Poetry

कॉफ़ी | अमिता गौतम

आंसू बहुत है मेरी आँखों में, तुम्हारे इंतज़ार की ही वजह है, शिक़वे भी बहुत है तुमसे मुझे, तुम मिलो तो सारे गिले दिखाऊ तुमको मै, पर अब हमारी मुलाकात मुझे वो अधिकार नहीं देगी,Continue reading

Paristhiti Aur Swabhav | Mid Night Diary | Abhishek Yadav
Poetry

परिस्थिति और स्वाभाव | अभिषेक यादव

क्यूँ शांत हो तुम, मजे की बात है हँसते क्यूँ नही, क्या छिपा है तुम्हारे भीतर बतलाते क्यूँ नहीं । क्या बतलाऊँ मैं… शायद हमने खुद में हँसना,गाना,रोना सीख लिया है, शायद इन्हें चेहरे परContinue reading