Day: January 13, 2018

Poetry

किसकी नज़र लग गयी | अरविन्द सक्सेना

जाने किसकी हमें नज़र लग गयी बद्दुआ किसकी आज असर कर गयी छोटी छोटी सी बात गहरी होती गयी होंठ सिलते गए आँखें रोती रहीं मांगते भी तो क्या जवाब मांगते खुद हमारी ही शायदContinue reading

Lakeerein | Mid Night Diary | Maninder Singh
Poetry

लकीरें | मनिंदर सिंह

कुछ लकीरें खींचते खींचते कागज़ पर एक तस्वीर उभर आई लगा कोई अपना है पहचान वाला बिछड़ा हुआ घमखवार कोई उसकी आँखों में अपना माज़ी दिख रहा था मुझे उसकी खुशबू गुज़रे वक़्त का एहसासContinue reading

Poetry

रक्त- ए-सफ़र | अश्वनी सिंह

मेरे रख्त-ए-सफ़र में लमहात के अलावा क्या था दिल के ताक़-ए-हरम में जलते चराग़ के अलावा क्या था साँसें हुई ज़र्रात सी सौ बार फ़िर भी रूह का सुकूँ अलहदा था शामें फ़िरदौस की होतीContinue reading