Day: January 12, 2018

Poetry

गुस्ताख़ मुरीद | निकिता राज पुरोहित

गुस्ताखी करने का इरादा न था हमारा, पर इस ज़बान ने सी कर इक लंबा अर्सा था गुज़ारा। अब जब सारा दर्द बिखेर ही दिया है, माफ़ कर जाने दो, कुछ इतना भी बुरा नहींContinue reading