Month: January 2018

Kab Milega | Mid Night Diary | Musafir Tanzeem
Poetry

कब मिलेगा | मुसाफिर तंज़ीम

दिल के हर कोने में ढूँढा मेरा यार कब मिलेगा लुटा के निकला था सब कुछ ये क़रार कब मिलेगा तलाश रहा हूँ जाने कहाँ कहाँ मेरे ग़मो का मुझको मज़ार कब मिलेगा हँस देतेContinue reading

Poetry

डिअर लव | प्रतिभा सिंह

जब ज़िन्दगी दर्द देगी.. तो तुम्हें मेरी याद तो आयेगी ना… खुशिया कितनी भी हो तब… तुम्हें खुद को सम्भालने के लिए.. मेरी जरूरत तो महसूस होगी ना… वक़्त बीत जायेगा कितना भी.. फिर भीContinue reading

Shahrikaran - Vardaan Ya Shraap | Mid Night Diary | Raushan Suman Mishra
Short Stories

“शहरीकरण” वरदान या शाप? | रौशन ‘सुमन’ मिश्रा

गाँव के पुरबारी मोहल्ले में एक नरायण बाबू थें। कहा जाता है कि गाँव की सत्तर फीसदी जमीन उनकी ही थी। यही नहीं गाँव के दस कोस में उनके सम्पति के बराबर वाला कोई नहींContinue reading

Poetry

कलम | अभिषेक यादव

मैं लिख रहा हूँ, क्या लिख रहा हूँ, नहीं पता। क्यूँ लिख रहा हूँ ,नहीं पता, कागज पर, कॉपी पर या दीवारों पर लिख रहा हूँ, नहीं पता। कहाँ लिख रहा हूँ ,नहीं पता, मैंContinue reading

Short Stories

गड्तंत्र की ज़मीनी हक़ीक़त | दीप्ति पाठक | गड़तंत्र दिवस विशेष

आज 26 जनवरी ,गणतंत्र दिवस की भोर न जाने मेरे मस्तिष्क पटल पर कितनी भूली बिसरी यादों का सैलाब ले आयी हो।वो पास के ही किसी स्कूल से आते देशभक्ति के गानों की आवाज़ों सेContinue reading

Paramatma Ke Sandesh | Mid Night Diary | Raghv Bharat
Short Stories

परमात्मा के सन्देश | राघव भरत

चलने से पहले आवाज़ यक़ीनन दी होगी उसने, यूँ ही कहाँ कोई ख़्वाबों में दस्तक देता है। आज नहीं कुछ दिनों बाद मिल लूंगा जाकर अभी मौसम बहुत सर्द है ,पहाड़ की बात और हैContinue reading

Tu Pyaar Na Kar | Mid Night Diary | Divyanshu Kashyap TEJAS
Poetry

तू प्यार न कर | दिव्यांशू कश्यप ‘तेजस’

तू मेरी जान मुझको इतना प्यार न कर, नयनों के अनुबंधो से मुझ पर अधिकार न कर गिरा के बिजलियॉ हुस्न की मुझ पर ये अपनी तू सुकून ए दिल को मेरे गिरफ्तार न कर,Continue reading

Main, Tum Aur Hum | Mid Night Diary | Pratibha Singh
Poetry

मैं, तुम और हम | प्रतिभा सिंह

याद रखना हमें.. बस इतनी ही तो गुजारिश की थी… राहों में चलते-चलते भूल ना जाना.. बस इतनी ही तो आरजू की थी… मुझे तो कभी ये ख्याल भी ना आया था.. कि तुम हमेंContinue reading

Halchal Almaari Ke Andar Ki | Bhavna Tirange Ki | Manjari Soni
Short Stories

हलचल अलमारी के अंदर की| भावना तिरंगे की | मंजरी सोनी

”सारा सामान निकाल कर जॉंच लो और जमा दो,ध्‍यान र‍हे कल सुबह कुछ परेशानी ना हो।” जैसे ही ये आवाज़ आई अलमारी के अंदर कुछ हलचल सी होने लगी। अलमारी में रखा तीरंगा मुस्‍कुराया औरContinue reading

Barf Se Lamhein | Mid Night Diary | Musafir Tanzeem
Poetry

बर्फ से लम्हें | मुसाफिर तंज़ीम

बर्फ़ जैसे जमे हुए लम्हें मुलाकातों की गर्मी से पिघलते हैं और रूहानी सी भाप उड़ती है जो हवा में अपनी ठंडक से खूबसूरत सा एहसास भर देती है फिर अगली मुलाकात तक दोनों नContinue reading