Day: December 29, 2017

Poetry

लिखता हूँ | रेस्तु कुमारी | #बचपनबोलताहै

आज भी गुल्लक में कभी कभी खन्न-खना जाती है मेरी नानादानियाँ, उस सरगम से प्यारी अवाज सुन मुस्कुरा रहा हूँ मैं, सोचता हूँ कि कितना नादान था वो बचपन अब झूठ पे झूठ की ईमारतContinue reading

Punar Janam | Mid Night Diary | Amrit | IshqDaari
Poetry

पुनर जन्म | अमृत | इश्क़दारी

गड्ढे से काम नही चलेगा, कुआँ खोदो, और उसमें गाड़ दो। नंगी आग पर, नंगा ही लिटा दो, और ठूँस दो मुँह में, उल्टी, धुआँ उगलती चिमनी। पेड़ से लटकाओगे फंदे में, तो जमीन तकContinue reading