Day: December 29, 2017

Rivaayat | Mid Night Diary | Abhinav Saxena
Ghazal

Rivaayat | Abhinav Saxena

मिरी खुद से अदावत हो रही है मुझे ये किसकी आदत हो रही है। हमीं से खुद नहीं मिल पा रहे हम किसी को तो शिकायत हो रही है। घने पेड़ों के साये हैं बहुतContinue reading

Poetry

Likhta Hun | Restu Kumari | #BachpanBoltaHai

आज भी गुल्लक में कभी कभी खन्न-खना जाती है मेरी नानादानियाँ, उस सरगम से प्यारी अवाज सुन मुस्कुरा रहा हूँ मैं, सोचता हूँ कि कितना नादान था वो बचपन अब झूठ पे झूठ की ईमारतContinue reading

Punar Janam | Mid Night Diary | Amrit | IshqDaari
Poetry

Punar Janam | Amrit | IshqDaari

गड्ढे से काम नही चलेगा, कुआँ खोदो, और उसमें गाड़ दो। नंगी आग पर, नंगा ही लिटा दो, और ठूँस दो मुँह में, उल्टी, धुआँ उगलती चिमनी। पेड़ से लटकाओगे फंदे में, तो जमीन तकContinue reading

Chura Le Gaye | Mid Night Diary | Amrit
Poetry

Chura Le Gaye | Amrit

सहर की ओट से शब चुरा ले गए, वो मस्जिदों से मजहब चुरा ले गए, गाँव लौटा तो शहर पसरा पाया धीरे धीरे कर के सब चुरा ले गए चौकीदार बन दरवाजे पे खड़े थेContinue reading