Day: December 21, 2017

Manzil | Mid Night Diary | Vishal Swaroop Thakur | Dreams
Poetry

मंज़िल | विशाल स्वरुप ठाकुर | ड्रीम्स

पग की चंचलता ने जब मंज़िल को ललकारा है मंज़िल ने पग को तब तब अपनी ओर पुकारा है रुके हुए पगों को तो धरती भी बोझ ही माने है ब्रह्मांड में वसुंधरा को भीContinue reading