Day: December 19, 2017

Nirbhaya | Mid Night Diary | Aditi Chatterjee | #16Dec
Poetry

निर्भया | अदिति चटर्जी | #१६दिसंबर

कल फिर एक और शाम बीत गई, बस लेकर उसका नाम बीत गई। हमने फिर चौहराहो पे दीए जलाए, मोमबत्तियाँ हाथों में लिए जलाए, दिसम्बर की सर्दी में फिर खून में गर्मी हुई, हुई नमContinue reading

Hame Nirbhaya Mat Banao | Mid Night Diary | Priya Mehra | #16Dec
Poetry

हमें निर्भया मत बनाओ | प्रिय महरा | #१६दिसंबर

साल बीत गए लोग भुल गए, पर भुली नहीं मै वो रात, जब खेला था गंदा खेल , कुछ दरिंदो ने मेरे साथ मैं चीख रही थी चिल्ला रही थी अपने हाथों को जोड़ उनकेContinue reading

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पहली बार | अभिनव सक्सेना | #नज़्म

मेरी मुस्कुराहट हमेशा से झूठी नहीं थी, और न ही मैं कभी उलझा हुआ था। बस मोहब्बत से नफरत सी है तुम्हारे बाद। तुम मुझे न तो मिल पायीं न मैं कभी खो ही पायाContinue reading