Day: December 14, 2017

Poetry

Koi Aur Hai | Prashant Sharma

हर दम जिस से मुआमला है मेरा, उसका सिलसिला कोई और है। हर्फ़ जैसा बिखरा पड़ा है वजूद मेरा, उसके जज़्बात कोई और है। मैं क़र्ज़ में दबा बेठा हु जिसके, उसका मोल कोई और है।Continue reading