Month: November 2017

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Jab Bhi Tum Yaad Aati Ho | Dinesh Gupta

उम्र के हर पड़ाव में, जीवन के हर बदलाव में रात में कभी दिन में, धूप में कभी छाँव में जज़्बातों के दबाव में, भावनाओं के बहाव में ज़ख्मों पर मरहमों में, मरहमों पर फिरContinue reading

Kitne Hi Dafe | Mid Night Diary | Nikita Raj Purohit | Faith In Love
Poetry

Kitne Hi Dafe | Nikita Raj Purohit | Faith In Love

कितनी ही दफ़े खुद को समझाया, तू अब नहीं पलटेगा। पर इस दिल ने भी वहीं पुराना दोहराया, वो धडकन है, ज़रूर लौटेगा। कितनी ही दफ़े अश्कों से झुटलाया, उनकी वजह तेरी कमी नहीं। परContinue reading

Main, Tum Aur Ishq | Mid Night Diary | Saransh Shrivastva
Poetry

Main, Tum Aur Ishq | Saransh Shrivastava

मुझे बेवफा कहने वाले मेरे हमनफस तुमने तो वफ़ा की थी ना? चलो माना कि हम चले गए थे पर क्या तुमने मुझे कभी पुकारा? नहीं…. क्या तुमने कभी खुले आस्मां की आगोश में मुझसेContinue reading

Kisi Mod Par | Mid Night Diary | Prashant Sharma
Poetry

Kisi Mod Par | Prashant Sharma

मसला ये है की आशिकी में कुछ न कमाया हमने। ये जो दर्द में अमीरी है ये तो मिली है इनाम के तौर पर। जो तुमसे न मिली वो किसी और में ढूंढेंगे, लुटाएंगे अबContinue reading

Bachpan Jee Liya Karo | Manjari Soni | Happy Children's Day
#UnmuktIndia, Poetry

Bachpan Jee Liya Karo | Manjari Soni | Happy Children’s Day

वो जो बीत गया है बचपन तुम उसे बुला लिया करो, जहाँ कहीं मौका मिले तुम इसे जी लिया करो।। कभी यूँही दरवाज़े के पीछे छुपकर अपने दोस्तों को भौं कर दिया करो दफ़्तर में हींContinue reading

Bullet | Mid Night Diary | Mastana
Poetry

Bullet | Mastana

सड़को पे सोता इंसान घर मे बैठा बेरोज़गार कूड़े मे मुँह मारता कंकाल, और गरीबो के विकास मे अब बुलेट दौड़ेगा, मेरे हिन्दुस्तान मे। नॉर्मल ट्रेन समय पर नही ना अपनी स्पीड मे यहाँ वहाँContinue reading

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Kissa Hi Sahi | Ashish Kumar Lodhi

हवा की उस सरसराहट का हिस्सा हूँ मैं, जो सुनाया जा सकूँ, वो किस्सा हूँ मैं, अगर गलती से सुनाया, तो लड़ जाओगे, फैसला भर के लिए मिट – मर जाओगे, लड़ोगे इसलिए कि क्याContinue reading

Dikhawati Aansu | Mid Night Diary | Raushan Suman Mishra
Poetry

Dikhawati Aansu | Raushan Suman Mishra

प्रश्न उठाना लाजमी है तेरी दोहरी नीति पर, लाश बिछाया था तुमने बुद्ध अहिंसा धरती पर, बूढ़े मासूमो को मारा जिहाद के जब नामोंं पर, महिलाओं की आबरू लूटी क्या सच्चे इमानों पर, तब कानोंContinue reading

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Ehsaas | Dinesh Gupta

खिल उठी है कलियाँ सारी, चहक रहा आँगन-आँगन बहकी हुई है सारी फिज़ायें, महक रहा गुलशन-गुलशन रोम-रोम मदहोश हुआ, नाच रही धड़कन-धड़कन मौसम नया, रुत नयी, हवाओं में बात कुछ खास है तू सचमुच आईContinue reading