Month: November 2017

Sab Humein Kabool Hai | Mid Night Diary | Ashwani Singh
Poetry

सब हमें कबूल है | अश्वनी सिंह

वो खिज़ा में झड़ते पत्ते वो नदी का सूखा जाना वो जन्नत तक जाते रश्ते वो साखों का झुक जाना सब हमे क़ुबूल हैं वो इश्क़ के तामीर छत्ते वो परिंदे का वापस आना वोContinue reading

Raavan | Mid Night Diary | Musafir Tanzeem
Poetry

रावण | मुसाफिर तंज़ीम

जब तुम हँसते हो किसी सहकर्मी के स्तन या नितम्ब के बारे में छिछली सी बातें करके तब मुझे लगता है रावण अभी मरा नहीं है। बैठ गया है वो हमारे दिमाग में जब किसीContinue reading

Darmiyaan | Mid Night Diary | Dinesh Gupta
Poetry

दरमियान | दिनेश गुप्ता

तेरे सुर्ख होंठो की नरमियाँ याद है तेरी सर्द आहों की गरमियाँ याद है कुछ भी तो नहीं भूले हम आज भी जो कुछ भी था दरमियाँ याद है…. याद है बिन तेरे वो शहरContinue reading

Short Stories

चिंटू | गोपाल

आज डोरेमॉन नोबिता को कौन सा गैजेट देगा। सुनियो नजाने कौन सी डींग हाँकने वाला है। जियान किस किस को पीटेगा। सिजुका के सामने कैसे आज नोबिता बड़ी बड़ी बातें करेगा। भीम का पाला किस्सेContinue reading

Poetry

दिया अंतिम आस का | दिनेश गुप्ता

दीया अंतिम आस का, प्याला अंतिम प्यास का वक्त नहीं अब, हास-परिहास-उपहास का कदम बढाकर मंजिल छू लूँ, हाथ उठाकर आसमाँ पहर अंतिम रात का, इंतज़ार प्रभात का बस एक बार उठ जाऊँ, उठकर संभलContinue reading

Micro Tales

काम ख़तम | मुसाफिर तंज़ीम

रात के 2 बज रहे थे।चारों तरफ सन्नाटा और गलियों में सरकारी लाइटों का उजाला छाया हुआ था। सुमित के घर की बेल लगातार बज रही थी,ऐसा लग रहा था जैसे कोई बड़ी मुसीबत में होContinue reading

Ek Shaam | Mid Night Diary | Aman Singh | The Last Meeting
Benaam Khat

एक शाम | अमन सिंह | आखरी मुलाक़ात

याद है तुम्हें, कुछ हफ्तों पहले.. शाम के वक़्त साथ बैठे हुये, तुमनें मेरा हाथ अपने हाथ में ले लिया था और मैं बिना एक लफ्ज़ कहे, आँखों के अश्क़ों से कितना कुछ कह गयाContinue reading

Tum, Sirf Tum | Mid Night Diary | Saransh Shrivastva
Poetry

तुम, सिर्फ तुम | सारांश श्रीवास्तव

न जाने कौन सा रिश्ता है तुम्हारे और मेरे बीच शायद एक अनाम से रिश्ते के दरमियाँ हम तुम सफ़र कर रहे हैं कभी न ख़त्म होने वाला सफ़र एक रिश्ता ऐसा बन चुका हैContinue reading

Ek Kagaj | Mid Night Diary | Avnish Kumar | #UnmuktIndia
#OneGoOneImpact, #UnmuktIndia

एक कागज | अवनीश कुमार | #उन्मुक्तइंडिया

“कागज़ दिखाओ गाड़ी के” ऐसा बोल कर किसी चौराहे पर खड़ा पुलिस वाला आते जाते लोगो से चाय पानी का जुगाड़ कर लेता है। मै किसी नेता की तरह कागज़ की इस दशा पर बातContinue reading

Koi Apna Nhi | Mid Night Diary | Prashant Sharma | Sad Poetry
Poetry

कोई अपना नहीं | प्रशान्त शर्मा | सैड पोएट्री

अब रातों को सो कर क्या करे हम। मेरा तो अपना कोई सपना ही नही। किसी का गम करे तो क्यों करे हम। मेरा तो यहाँ कोई अपना ही नही। भरी बज़्म को ही अपनाContinue reading