Month: October 2017

Short Stories

जरुरी बात | विशाल स्वरुप ठाकुर

कलाकार और सलाहकार में एक फासला होना चाहिए। मैं मानता हूँ कि कलाकार की जिंदगी में सलाहकार की कोई जरूरी आवश्यकता नहीं है। क्योकि कलाकार अपनी कला के माध्यम से बना है ना कि किसीContinue reading

Poetry

लड़का होना | अदिति चटर्जी | #मीटू

मुस्कुराता मौज में, वो रमता इधर उधर, पुचकारते थे लोग उसको, वो जाता था जिधर, छोटी साड़ी पहनाकर बिंदी उसको लगाती थी लड़की सा सजा उसको माँ खूब दुलार जताती थी। वो नान्हा बच्चा धीरेContinue reading

Poetry

ज़ुस्तज़ू-ए-यार | अदिति चटर्जी

जुस्तजू-ए-यार में मशरूफ होना गर लाज़मी है, कू-ए-दिल में हंगामा होना तो लाज़मी है। वो भी आएगा के जब आएगी मेरी याद, मोहब्बत में इतना गुमान होना तो लाज़मी है। पड़ी धुप गर जो मिज़्गान-ए-यार,Continue reading

Papa Ek Baat Btaao | Mid Night Diary | Hridesh Kumar Sutrakar
Poetry

पापा एक बात बताओ | हृदेश कुमार सूत्रकार

पापा एक बात बताओ जब में पैदा हुआ तो क्या कोई साथ में लाया था, उस खत में मैंने नाम के संग क्या मजहब,जात किसीसे लिखवाया था। में किस राज्य का हूँ , या देशContinue reading

Lallu Miyaan | Mid Night Diary | Shubham Negi | Comedy
Poetry

लल्लू मियाँ | शुभम नेगी | कॉमेडी

लल्लू मियां निकले घर से सज धज हो तैयार पूछा जब तो बोले भैया जा रहा बाजार। जा रहा बाजार कि भैया ले लूँ कुछ सामान बीच बाजार में मिल गयी इनको गणित की एकContinue reading

Poetry

आज भी | अदिति चटर्जी | लॉस्ट लव

मेरे दिल में तेरी फ़िक्र आज भी है, लबों पे दिन-रात तेरा ज़िक्र आज भी है, शर्मा के झुक जाती है आँखे ये इनमें झलकती तेरे होने की खुशी आज भी है… यूं तो अबContinue reading

Tyohaar | Mid Night Diary | Raushan 'Suman' Mishra | Happy Diwali
Short Stories

त्योहार | रौशन ‘सुमन’ मिश्रा | हैप्पी दिवाली

पूरा गाँव पिछले दो तीन दिन से तेल की खुशबुओं में सन गया है, लोग अस्त व्यस्त दिख रहे हैं। टोला के बिलट भी रामप्रसाद के दुकान से अपना सनुआ के लिए बीड़ी फटका लेContinue reading

Khushi Nhi Milti | Mid Night Diary | Deepti Pathak | Happy Diwali
Poetry

ख़ुशी नहीं मिलती | दीप्ति पाठक | हैप्पी दिवाली

जो मिलती थी उस दीवाली, आज वो खुशी नहीं मिलती। जब माँ अपने बचाये पैसों से कपड़े दिलाती थी और बाबा लेकर लोन घर में स्कूटर लाते थे। फिर उन कपड़ों को पहन इतराना औरContinue reading

Peeli Roshani Wala Bulb | Mid Night Diary | Samarpan Pandey
Poetry

पीली रोशनी वाला बल्ब | समर्पण पाण्डेय | हैप्पी दिवाली

आज बात करते हैं, वो पीली रौशनी वाले बल्ब की, अब तो बदल गया है वक़्त, तब की बात कुछ और होती थी, कुछ उदास सा लगता था वो, जैसे किसी ने सूरज को ज़बरदस्तीContinue reading