Day: October 18, 2017

Pardeshiyon Ke Mele | Mid Night Diary | Roshan 'Suman' Mishra
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परदेशियों के मेले | रौशन ‘सुमन’ मिश्रा

घास पर बिखरे ओस की बुँदे छोटी छोटी मोतियों की तरह चमक रही है ठंडी नरम हवा मन को ओत प्रोत कर रही है, दूर तक खेतों में सिर्फ धान की कटी हुई जरें दिखाईContinue reading

Kuch Nhi | Mid Night Diary | Megha Singh
Poetry

कुछ नहीं | मेघा सिंह

अक्सर तुम शाम को घर आ कर पूछते आज क्या क्या किया?? मैं अचकचा जाती सोचने पर भी जवाब न खोज पाती कि मैंने दिन भर क्या किया आखिर वक्त ख़्वाब की तरह कहाँ बीतContinue reading

Poetry

अजनबी | दीप्ति पाठक

अजनबियों की महफ़िल में, फिर से अजनबीयों सा नज़र आ तो सही ।। अधूरा ही सही वो इश्क़ फरमा तो सही।। जीने दे वो लम्हें फिर से, जो रह गए थे पिछले इश्क़ में।। मेरीContinue reading