Day: October 7, 2017

Poetry

मैं व्यापारी हूँ | जय वर्मा | द लाफ्टर डोज़

हलवाई की दुकान पर जाके, मैंने कहा, हमें चाहिए छैना। हलवाई मुस्कुराया और बोला, आइये भाई साब! है न। एक है मलाई वाला और एक है सादा। स्वाद एक सा है, पर मलाई वाला हैContinue reading

Prem Me Phir Se Jeene Lga Hu | Mid Night Diary| Raushan Kumar 'Suman'
Love, Poetry

प्रेम में फिर से जीने लगा हूँ | रौशन ‘सुमन’ मिश्रा

तुम्हें पाने की कोशिशें खाक करके, खुद को पाने की राह पर चलने लगा हूँ। देख ना ले नजरें कोई तस्वीर तुम्हारी, बचपन के खिलौने सा छुपाने लगा हूँ। शहर में बदनाम हैं मेरे नामContinue reading