Day: October 4, 2017

Mera Dard | Mid Night Diary | Kumar Jitendra
Poetry

Mera Dard :: Kumar Jitendra

मुझे एक दर्द है की एक दर्द है मुझे उलझन बस इतनी सी है की क्या दर्द है मुझे ? जो अपना सा कोई दे गया क्या दर्द है वो ? क्या दवा है दर्दContinue reading

Benaam Khat, Love

Kaatil :: Vaidehi Sharma

तुम्हारी आँखों की चमक से मेरा राबता उतना ही गहरा है, जितना हमारे दरमियान बैठे हुए इस सन्नाटे का है। हमारे दफ़न हो चुके जज़्बातों के साथ ठीक वैसे ही जैसे इसे किसी सख़्त चीख़Continue reading