Month: October 2017

Poetry

खुदा का सौदा | अदिति चटर्जी

आहटों से टूटी नींद, मैं सहम गई, कभी इस कमरे कभी उस कमरे कभी यहाँ कभी वहाँ गई, हल्की फुलकी रौशनी थी, पाँचवे पे काँटा था, ‘रहने भी दो! कोई वहम होगा’ अभी तो मोहल्लेContinue reading

Tumhe Yaad Ho Ki Naa Yaad Ho | Mid Night Diary | Sumit Jha
Poetry

तुम्हे याद हो कि न याद हो | सुमित झा

तुम्हें याद हो कि न याद हो, कि आज की जैसी ही रातों में कभी कुछ सालों पहले मैंने तुमसे और तुमने मुझसे प्रेम किया था! तुम्हें याद हो कि ना याद हो, कि इसीContinue reading

Maithili Ki Prem Kahani | Mid Night Diary | Shreya Levy
Short Stories

मैथिलि की प्रेम कहानी | श्रेया लेवी

२५ सितम्बर २००० कॉलेज में एक नयी लड़की आयी थी, मैथिली। बहुत सुन्दर है वो, बाल लम्बे लम्बे काली घटा से लगते है। हर बार की तरह नए एड-मिशन वालो की रैगिंग का प्रचलन था,Continue reading

Bahroopiya Prem | Mid Night Diary | Veebha Parmar
Poetry

बहरूपिया प्रेम | विभा परमार

प्रेम बहरूपियापन से कम नहीं प्रेम के अनेकों रूप बेचैनी छटपटाहट आशा निराशा आकर्षण मौन खनकती हँसी जो बयां कर देती है सबकुछ तुम्हारा मेरे अंदर रोज़ बढ़ना और मेरे अंदर मेरा ही कम होContinue reading

Lakadi Ka Radio | Mid Night Diary | Anubhav Kush
Short Stories

लकड़ी का रेडिओ | अनुभव कुश

दीवाली……! दीवाली सिर्फ दीवाली नहीं बल्कि एक ओवरडोज होता है। सबकुछ तो होता है इसमें – सफाई, दीवारों में नए रंग, बहुत सारी झालरें और पटाखे भी। उन दिनों मेरी उम्र थी बारह साल, क्लासContinue reading

Ishq Sarhad Paar Ka | Mid Night Diary | Hridesh Kumar
Poetry

इश्क़ सरहद पार का | हृदेश कुमार सूत्रकार

मुझे अब तो डर भी लगने लगा है .. कल खाना खाते वक़्त माँ ने मुझसे पूछा की अगर कोई लड़की पसंद हो तो बता दो ! सच कहु मैंने सर झुका कर मना करContinue reading

Intejar-e-Mulaqaat | Mid Night Diary | Manjari Soni
Micro Tales

इन्तजार-ए-मुलाक़ात | मंजरी सोनी

दबे पाव ख़ामोशी से ऊँची-नीची सीड़ियों से होते हुए ,तुम शहर के बाहर वाले टूटे-फूटे महल की छत पर आना ,मैं बना के लाऊँगी मैथि के पराँठे खटे मीठे निम्बू के अचार के साथ फिरContinue reading

Abhi Baaki Hai | Mid Night Diary | Aditi Chatterjee
Poetry

अभी बाकी है | अदिति चटर्जी

कुछ शिकायत, कुछ सवाल अभी बाकी है, मेरा होना थोड़ा और बुरा हाल अभी बाकी है, किसी शाम बैठ कर करेंगे इसपे बात कि एक और मुलाक़ात अभी बाकी है। पूछना है तुमसे कि वोContinue reading

Wajood | Mid Night Diary | Vaidehi Sharma
Micro Tales

वजूद | वैदेही शर्मा

मेरा वक्त, मेरे सवाल, मेरे वहम… सब बिखरे पड़े थे जैसे किसी चादर की सलबटो से हो….. खामोशियाँ यूँ छाई थी जैसे, ना तू बोलना जनता हो ना मैँ.. मैंने उन अल्फ़ाज़ों को कई बारContinue reading

Poetry

मेरा पहला प्यार | अदिति चटर्जी

बिना झिझक लोगों से मिलना, रोज़ नए दोस्त बनाना, इज़हार-ए-मोहब्बत बिन सोचे कर जाना, सबकुछ हमेशा से ऐसा नहीं था। पलके झुकी रह गईं थी, घबराहट के कितने घूंट उतरे थे, बेक़रारियों-बेचैनियों का आलम था,Continue reading