Month: September 2017

Red Light Wali Ladki Se ISHQ | Inspired From True Events | Mid Night Diary | Suraj Maurya
Love, Short Stories

रेड लाइट वाली लड़की से इश्क़ | सूरज मौर्या | इंस्पायर्ड फ्रॉम ट्रू इवेंट्स

भोलेनगर में जन्मी अनुराधा की दास्तान दुखद और फिल्मी सी है. अनुराधा बेइंतहा खूबसूरत थी, पर उस की बदकिस्मती यह थी कि जब वह 15 साल की हुई तो मांबाप का साया सिर से उठContinue reading

Poetry

पर ज़िंदगी चलती रही | जय वर्मा

घड़ी-घड़ी , क्षण- क्षण , कदम-कदम , पर छलती रही। खुद ही बनाया गूमड़, और उसे मलती रही। कई बार घेरे निराशा, और ये खलती रही। अब है खत्म कहानी या बाकी, असमंजस में डुलतीContinue reading

Curse of Modernity - "Blue Whale Challenge Game" | Mid Night Diary | Roshan 'Suman' Mishra
Short Stories

कर्स ऑफ़ मॉडर्निटी – ‘ब्लू व्हले चैलेंज गेम’ | रौशन ‘सुमन’ मिश्रा

बात यही कुछ 7 से 8 साल पहले की है, मैं अपने रिस्तेदार के यहाँ कुछ दिनों के लिए गया था, उस वक्त उनके घर में बूढ़े दम्पति के अलावा उनकी एक पुत्रवधु और 6Continue reading

Poetry

अन्यथा व्यर्थ तेरा जीना है | अनुपमा वर्मा

स्वार्थ सिद्धि कर रहा धरा पर व्यर्थ बोझ तू स्वयं से आगे बढकर देख आएगा स्वयं के फिर करीब तू जब तलक प्राण शेष है कर दूसरो पर निसार तू अन्यथा व्यर्थ तेरा जीना हैContinue reading

Love, Poetry

कलम और तुम | मिहिर पाण्डेय

क़लम में स्याही भर ली है। आज न जाने क्यूँ लिखने को दिल चाहा है। तुम्हारे लिए लिखूँ या तुमसे जुड़ी यादें लिखूँ। ऊँगलियाँ को थोड़ा संकोच है। तुम्हारे बारे में सच लिख नहीं सकता।Continue reading

Ujjhan 'Stress' | Mid Night Diary | Aman Singh
Benaam Khat, Love, Micro Tales

उलझन | अमन सिंह | #बेनामख़त

बस यह समझ लो कि मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं क्या करूँ? हसूँ, मुस्कुराऊँ, रोऊँ या चिल्लाऊँ… कोई तकलीफ़ होती तो कहता, कोई दुःख होता तो ज़ाहिर करता लेकिन इस उलझन का क्याContinue reading

Matrabhoomi | Mid Night Diary | Shridhar Nath Gandhi
Poetry

मातृभूमि | श्रीधर नाथ गाँधी

धन्य हूँ में , इस धन्य धरा पर , मेंने जन्म लिया । जिसका शीष हिमालय , चरणों में सागर , मेंने ऐसी अनुपम धरा पर जन्म लिया । जहाँ राम हुए जहाँ बुद्ध हुएContinue reading

Love, Poetry

शायद प्यार | कुमार जीतेन्द्र

कुछ तो होगा तुझसे राबता (ज़ारा) वरना यू देख के चेहरा तेरा मैं मुस्कुरा गया कैसे ? कुछ तो तपिश रही होगी आँखों में तेरे बरना जाने पर मेरे आँखों में आंशु तेरे रह गयाContinue reading

Roz Ki Bheed Bhaad | mid Night Diary | Pravin Pandey
Short Stories

रोज़ की भीड़ भाड़ | प्रवीण पाण्डेय

रोज़ की भीड़ भाड़ से कुछ अलग ही लग रही थी आज की भीड़ ट्रेन में… पता नहीं क्यूँ लोगों के चेहरे आज अच्छे नहीं लग रहे थे, और ना ही उनकी हँसी अच्छी लगContinue reading