Month: September 2017

Red Light Wali Ladki Se ISHQ | Inspired From True Events | Mid Night Diary | Suraj Maurya
Love, Short Stories

Red Light Wali Ladki Se ISHQ | Inspired From True Events

भोलेनगर में जन्मी अनुराधा की दास्तान दुखद और फिल्मी सी है. अनुराधा बेइंतहा खूबसूरत थी, पर उस की बदकिस्मती यह थी कि जब वह 15 साल की हुई तो मांबाप का साया सिर से उठContinue reading

Poetry

Par Zindagi Chalti Rahi

घड़ी-घड़ी , क्षण- क्षण , कदम-कदम , पर छलती रही। खुद ही बनाया गूमड़, और उसे मलती रही। कई बार घेरे निराशा, और ये खलती रही। अब है खत्म कहानी या बाकी, असमंजस में डुलतीContinue reading

Poetry

Anyatha Vyarth Tera Jeena Hai

स्वार्थ सिद्धि कर रहा धरा पर व्यर्थ बोझ तू स्वयं से आगे बढकर देख आएगा स्वयं के फिर करीब तू जब तलक प्राण शेष है कर दूसरो पर निसार तू अन्यथा व्यर्थ तेरा जीना हैContinue reading

Love, Poetry

Kalam Aur Tum

क़लम में स्याही भर ली है। आज न जाने क्यूँ लिखने को दिल चाहा है। तुम्हारे लिए लिखूँ या तुमसे जुड़ी यादें लिखूँ। ऊँगलियाँ को थोड़ा संकोच है। तुम्हारे बारे में सच लिख नहीं सकता।Continue reading

Ujjhan 'Stress' | Mid Night Diary | Aman Singh
Benaam Khat, Love, Micro Tales

Uljhan

बस यह समझ लो कि मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं क्या करूँ? हसूँ, मुस्कुराऊँ, रोऊँ या चिल्लाऊँ… कोई तकलीफ़ होती तो कहता, कोई दुःख होता तो ज़ाहिर करता लेकिन इस उलझन का क्याContinue reading

Matrabhoomi | Mid Night Diary | Shridhar Nath Gandhi
Poetry

Matrabhoomi

धन्य हूँ में , इस धन्य धरा पर , मेंने जन्म लिया । जिसका शीष हिमालय , चरणों में सागर , मेंने ऐसी अनुपम धरा पर जन्म लिया । जहाँ राम हुए जहाँ बुद्ध हुएContinue reading

Love, Poetry

Shayad Pyaar

कुछ तो होगा तुझसे राबता (ज़ारा) वरना यू देख के चेहरा तेरा मैं मुस्कुरा गया कैसे ? कुछ तो तपिश रही होगी आँखों में तेरे बरना जाने पर मेरे आँखों में आंशु तेरे रह गयाContinue reading

Roz Ki Bheed Bhaad | mid Night Diary | Pravin Pandey
Short Stories

Roz Ki Bheed Bhaad

रोज़ की भीड़ भाड़ से कुछ अलग ही लग रही थी आज की भीड़ ट्रेन में… पता नहीं क्यूँ लोगों के चेहरे आज अच्छे नहीं लग रहे थे, और ना ही उनकी हँसी अच्छी लगContinue reading

Ajnabi | Mid Night Diary | Kumar Jitendra
Love, Poetry

Ajnabi

बस देख तेरी आँखो में हम, तुझको अपना पाए है, मन मस्त गगन की गलियों में, दो चार छंद ये गाए है। पर तुम ना हम को जाने है, ना तुमको हम जाने है, तुमContinue reading